चंदौसी/बनियाठेर (संभल)। एक ओर सरकार नवंबर माह को सड़क सुरक्षा माह के रूप में मना रही है। वहीं दूसरी ओर मुरादाबाद-आगरा हाईवे पर बने डिवाइडर बिना संकेतक के हादसे की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। सर्दियों के मौसम में सुबह शाम हाईवे कोहरे की चादर में ढका रहता है। शुरुआती दिनों में कोहरा हल्का रहता है। परंतु धीरे-धीरे कोहरा घना होता जाता है। जिसके बाद लोग हादसों का शिकार होना शुरू हो जाते हैं। हाईवे पर बने डिवाइडर क्षतिग्रस्त अवस्था में है। उन पर संकेतक भी नहीं लगे हैं।
बनियाठेर के न्यू बाईपास स्थित टी प्वाइंट से लेकर ट्रक ले बाई के मध्य हाईवे पर आठ लाइट लगी हुई हैं जोकि खराब पड़ी हैं। इससे रात भर हाईवे पर ले बाई (वाहन चालकों के लिए रुकने की जगह) पर अंधेरा रहता है। थके मांदे ट्रक ड्राइवर अपनी गाड़ी इसी ले बाई में लगाकर आराम कर लेते हैं। अंधेरा अधिक होने के कारण चालकों में असुरक्षा की अनुभूति होती है। वहीं टी प्वाइंट पर मानक के विपरीत बने डिवाइडरों से टकराकर आए दिन वाहन चालक हादसों का शिकार हो जाते हैं।
न्यू बाईपास के टी प्वॉइंट से लेकर बहजोई रोड स्थित टी प्वॉइंट तक चार किलोमीटर लंबा मार्ग है। जिसकी दोनों ओर से शुरुआत डिवाइडर से होती है। जिन पर संकेतक ना होने के कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं।
ट्रक ले बाई पर भी सुविधाओं के टोटा
न्यू बाईपास पर शिवा ढाबे के निकट ट्रक ड्राइवर व दैनिक यात्रियों के आराम के लिए बनाए गए ले बाई पर हाईवे से होकर गुजरने वाले यात्रियों की सुविधाओं के लिए लेडीज व जेंट्स टॉयलेट बाथरूम के अलावा रेस्ट रूम भी बनाया गया है। जहां थके हारे ट्रक ड्राइवर व परिवार के साथ निकले लोग लंबे सफर के बाद घंटे दो घंटे आराम कर सकते हैं। परंतु ट्रक ले बाई का बना भवन अपने हालात पर आंसू बहा रहा है। मिशन शक्ति के दौर में हाईवे पर बने लेडीज टॉयलेट बदहाल पड़े हैं। उन पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी का ताला जड़ा हुआ है। वहां बने रेस्ट रूम लेडीज टॉयलेट अन्य कमरों में ताले लटके हैं। वहीं जेंट्स टॉयलेट में गंदगी का अंबार लगा है।
न्यू बाईपास निर्माण के शुरुआती दिनों में यहां चौकीदार व एक अन्य कर्मचारी रहते थे। साथ ही ले बाई के किनारे लगी आठ स्ट्रीट लाइटों की रोशनी में ले बाई की सड़क जगमग रहती थी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी की अनदेखी के चलते भवन जर्जर हो चला है।
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इनकी सुनो:-
चंदौसी न्यू बायपास टी प्वाइंट पर बिना संकेतक बने डिवाइडर पर चढ़कर कई वाहन पलट चुके हैं। आए दिन हादसे होते रहते हैं। डिवाइडर पर संकेतक लगवानी चाहिए। जिसे हादसे रुक सकें।
-धोनी सिंह, गांव देवरखेड़ा
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जिस ईमानदारी से लोग रोड व टोल टैक्स सरकार को भरते हैं। इसी के मद्देनजर प्रशासन को लोगों की मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए। हाईवे पर पथ प्रकाश, संकेतक, लेडीज टॉयलेट आदि की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही इलेक्ट्रिकल वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट भी बनवाने चाहिए।
-कृष्ण औतार सिंह, गांव देवरखेड़ा
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सर्दी के मौसम में कोहरा आने के कारण संकेतक के माध्यम से डिवाइडर से लोग टकराने से बच जाते हैं। परंतु जब डिवाइडर पर संकेतक ही नहीं है तो हादसा होने अंदेशा बना रहता है। इनकी रोकथाम के लिए डिवाइडर की मरम्मत व संकेतक लगवाने का ध्यान रखना चाहिए।
-सुरेश राणा, गांव देवरखेड़ा
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गांव में दूध खरीद कर होटल पर बेचने का काम करता हूं। सुबह शाम शिवा ढाबे तक जाना होता है। शाम के वक्त ट्रक ले बाई पर लगीं स्ट्रीट लाइटें खराब होने के कारण घना अंधेरा छाया रहता है। डिवाइडर पर संकेतक भी नहीं है। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
-ब्रजलाल मौर्य, गांव भुलावई
चंदौसी के हाइवे पर टी प्वाइंट पर डिवाइडर का टूटा हुआ संकेतक चिन्ह। संवाद