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कई प्रदेशों में संभल के हर्बल गुलाल की मांग बढ़ी

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संभल के शहजादी सराय में गुलाल को सुखाता मजदूर। - फोटो : SAMBHAL
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संभल। प्रदेश में हर्बल गुलाल करने की मात्र दो इकाईयां हैं। एक हाथरस और दूसरी संभल। संभल में तैयार हो रहा हर्बल गुलाल इस समय काफी मांग में हैं। उत्तर प्रदेश के कई जिलों से बड़ी मांग आ रही है। इस बार आठ दिन पहले से होली मनाने का उत्सव शुरू होने वाला है। यह दावा हर्बल गुलाल के कारोबारी बृजेश कुमार गुप्ता का है। उनका कहना है कि माल गुणवत्ता उत्तम होने के कारण संभल के गुलाल की मां बढ़ी है।
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कारोबारी के अनुसार इस बार गुलाल का बड़ा कारोबार होने की उम्मीद है। बृजेश कुमार गुप्ता का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते कारोबार मंदी के दौर से गुजरा लेकिन इस बार दोनों वर्षों के दौरान हुआ घाटा पूरा होता नजर आ रहा है। कारोबारी के अनुसार भगवा गुलाल की सबसे ज्यादा मांग है। चुनाव के परिणाम को लेकर भी मांग बढ़ी हुई है।
उन्होंने बताया कि 16 तरीके के हर्बल गुलाल बनाए गए हैं। इनमें अलग-अलग सुगंध मिलाई जाती है। यह गुलाल अरारोट से तैयार किया जाता है। इससे त्वचा को भी कोई नुकसान नहीं होता है। बताया कि इस समय सबसे ज्यादा मांग भगवा रंग की है। यह मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मेरठ, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बरेली जिले से आ रही है। उत्तरखंड, पंजाब, हरियाणा, चेन्नई व दिल्ली से भी मांग काफी है।
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1980 से शुरू हुआ था संभल में गुलाल बनाने का काम
संभल हड्डी सींग के हैंडीक्राफ्ट के लिए तो देश के अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में जाना जाता है, लेकिन गुलाल की पहचान भी प्रदेश के अलावा अन्य कई राज्यों में होने लगी है। बृजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्होंने कारोबार की शुरूआत 1980 में की थी। उस समय उनके पिता का भी सहयोग रहता था। उन्होंने बताया कि उनके बेटे हर्ष अब कारोबार को देखते हैं।
दिसंबर तक गुलाल की कोई मांग नहीं थी तो काफी चिंता में थे। विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित होते ही मांग बढ़ी और इस समय मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान जो मंदी के चलते घाटा हुआ था वह इस बार पूरा हो जाएगा।
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हर्ष गुप्ता, गुलाल कारोबारी, संभल
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