नव वर्ष और क्रिसमस की धूम के बाद जब विदेशों में बाजार खुला तो मैंथा तेल के भावों को झटका लगना शुरू हो गया लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डिमांड बने रहने के कारण भारतीय बाजार में भी उतार चढ़ाव तो रहा लेकिन भावों में तेजी बरकरार रही लेकिन फरवरी शुरू होते ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी मांग में गिरावट आई, साथ ही नए फसल की आमद को लेकर भड़सालियों व किसानों ने रखा पुराना मैंथा तेल अचानक बाजार में उतार दिया, जिससे बाजार को जोरदार झटका लगा है। दो फरवरी से अब तक ढ़ाई से तीन सौ रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है।
दिसंबर माह से ही मैंथा के भावों में भारी तेजी का रुख रहा। यही कारण रहा कि विदेशी बाजार दस दिनों तक बंद रहने के बावजूद भारतीय मैंथा बाजार पर कुछ अधिक प्रभाव नहीं पड़ा, हालांकि लगातार तेजी के रुख को देखते हुए किसानों ने और अधिक तेजी की संभावना को देखते हुए अपने पास मैंथा तेल रोक लिया। भड़सालियों ने भी यही किया। समीक्षकों का मानना था कि यह तेजी अनावश्यक है, सटोरियों द्वारा एमसीएक्स पर पैदा की गई तेजी है, क्योंकि वास्तविक कारोबार हो ही नहीं रहा था। लेकिन बाजार का रुख तेजी की ओर रहा। जिससे किसानों को फायदा भी पहुंचा। लेकिन फरवरी शुरू होते ही मैंथा तेल का भाव करीब 1700 रुपये प्रति किलो रहा लेकिन दो फरवरी से सौ रुपये की गिरावट के साथ जो गिरावट का दौर शुरू हुआ, वह अभी तक नहीं रुका है, आज का भाव 1460 रुपये रहा।
करीब ढ़ाई सौ रुपये की गिरावट देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण अब नई फसल की आमद है, किसानों ने पुराना भंडारित तेल बाजार में उतार दिया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी मांग में अचानक कमी आ गई हैं।