चंदौसी। मौसम में बदलाव हो रहा है। दिन का तापमान बढ़ रहा है तथा रात की ठंड बरकरार है। ऐसे में रबी की फसलों में माहू कीट के बढ़ने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक गेहूं और सरसों की फसल सबसे अधिक प्रभावित होगी। कृषि विशेषज्ञ फसलों की देखभाल करने और समय रहते फफूंदी नाशक का छिड़काव करने की सलाह दे रहे हैं।
दिन में तापमान बढ़ने और रात को सर्दी के चलते रबी की फसलें में माहू कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। माहू कीट हल्के भूरे रंग का होता है। यह फसल की पत्तियों और फूलों का रस चूस लेता है। जिससे पौधे सूख जाते हैं, इसका असर उत्पादन पर पड़ता है। छोटे आकार का यह कीट झुंड में फसलों पर हमला करते हैं। यह पौधे के जिस भाग से रस चूसता है, वहां पर एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है। जिससे पदार्थ के स्थान पर काली फफूूंदी जम जाती है। इससे प्रभावित भाग काले रंग का दिखाई देता है और पौधे का प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होती है। माहू के अत्यधिक प्रकोप से फसल का उत्पादन घट जाता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि किसान माहू कीट के प्रभाव से फसल को बचाने के लिए निमारिन या क्यूनालफास 20 प्रतिशत ईसी को दो से ढाई लीटर की मात्रा में 600 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसके अलावा किसान नियमित फसलों को निगरानी करते रहे। अन्य लक्षण दिखने पर कृषि विशेषज्ञों की राय लें।
मौसम दिन में धूप खिलने और रात को ठंड बढ़ने पर माहू कीट का प्रकोप बढ़ता है। यह रबी की गेहूं व सरसों की फसल को अधिक प्रभावित करता है। किसान फसल में फफूंद आदि का ध्यान रखें, ताकि समय रहते उपचारित किया जा सके।
डॉ. अरविंद कुमार, कृषि वैज्ञानिक, जिला कृषि विज्ञान केंद्र, पथरा, संभल