मोहर्रम की नौ तारीख को कर्बला में जंग का आगाज होना था, लेकिन इमाम हुसैन ने यजीदियों से एक रात की मोहलत मांगी ताकि रात भर खुदा की इबादत कर सकें। इसी की याद को ताजा रखते हुए शुक्रवार को सिरसी के कर्बला समेत सभी इमामबाड़ों और मजारों पर चिरागां किया गया। दीयों की लंबी कतार लगाई गई। या हुसैन या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
कर्बला सादात पर विशेष रुप से चिरागा किया गया था। भव्य सजावट भी की गई थी। एक किलोमीटर दूरी तक लोग ही लोग नजर आ रहे थे। सरसों के तेल के दीये सजाए गए थे। दीयों रोशन करने के लिए तकरीबन आठ क्विंटल सरसों का तेल ललाया गया। दूरदराज से आए लोग दरगाहों पर पहुंचे लोग देररात तक दुआएं और मन्नतें करते रहे।
मोहल्ला शर्की स्थित कर्बला पर हजरत अब्बास अलमदार के रोजे की भी सजावट की गई। मुतवल्ली रजा अब्बास उर्फ राजा मियां की देखरेख में रोजे को सजाया गया था। अंजुमन तबलीगे अजा की जानिब से तीन बजे जुलूस निकाला गया।
मोहल्ला माकूफा में मौलाना काजी नाजिम ने मजलिस को खिताब फरमाया। राजे ने मर्सिया पढ़ा। मजलिस के बाद जुलूस निकाला गया। मुहाफिजे अजा, रौनके अजा, फैजे पंजेतनी आदि अंजुमनों ने नोहाख्वानी और सीनाजनी की। हुसैन जाफरी, सय्यद मुन्ने, मास्टर नसीम, इमामरजा, कुमेल, आयम, तौकीर हैदर जाफरी, मजारुल पहलवान, मकसूद, शाह आलम आदि रहे।