गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के सैजना मुस्लिम गांव में शनिवार की लुटेरों ने एक परिवार पर कहर बरपाया। नकाबपोश बदमाशों ने मकान के पीछे से चढ़कर मां बेटी को बंधक बनाकर लूटपाट शुरू कर दी। शोर मचाने से गुस्साए बदमाशों ने मां बेटी के सिरों पर रॉड से प्रहार कर लहूलुहान कर दिया।
सात महीने का बेटा रोया तो बदमाशों ने निर्दयता की हदें पार करते हुए मासूम के मुंह पर भी रॉड से प्रहार किए। शोर शराबा सुनकर पड़ोस में रह रहा भतीजा जाग गया। शोर मचाया तो गांव में जाग हो गई। बदमाश लूटा गया सामान लेकर भाग गए। घायलों को उपचार के लिए अलीगढ़ ले जाया गया लेकिन मां की मौत हो गई।
गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के सैंजना मुस्लिम गांव निवासी महबूब तो सहसवान में हो रहे पुल निर्माण में जनरेटर आपरेटर है। उसकी पत्नी नफीसा बेगम घर पर अकेली रहती है, दस दिन पहले ही उसकी इकलौटी बेटी मनीशा (25) अपने सात माह के बेटे के साथ उसकी घर आई थी।
शनिवार की रात बदमाश पीछे कब्रिस्तान की ओर से उसके घर में चढ़ गए। बताते हैकि बदमाशों की आहट से नफीसा जाग गई, शोर मचाने लगी। उसकी बेटी भी जाग गई लेकिन बदमाशों ने मां-बेटी को बंधक बना लिया। पहने हुए गहने छीन लिए। नफीसा फिर भी चुप नहीं हुई और छत की ओर भागी तो बदमाशों ने लोहे की सरियों से उसके सिर पर प्रहार कर दिया।
मां को घायल देख बेटी मुनीशा भी चीखने लगी तो बदमाशों ने उसके सिर पर लगातार प्रहार किए। इसी बीच सात माह का नौनिहाल भी रोने लगा तो बदमाशों ने उसका मुंह कुचलने के लिए किसी वस्तु से प्रहार कर दिया। दो तीन बदमाश लगातार घर में लूटपाट करते रहे।
लेकिन इसी बीच पड़ोस में नफीसा के भतीजे सद्दाम ने चीख सुनकर आवाज दी, बाद में शोर मचा दिया तो ग्रामीण दौड़ने लगे। यह देख बदमाश लूटा गया सामान लेकर भाग निकले। ग्रामीणों के दरवाजा खटखटाने पर मुनीशा ने किसी तरह दरवाजा तो खोल दिया लेकिन वहीं बेहोश होकर गिर गई।
इसके बाद गुन्नौर थाना पुलिस, सीओ प्रमोद कुमार भी मौके पर पहुंच गए। घायलों को अलीगढ़ भिजवाया लेकिन नफीसा को रविवार की सुबह मौत हो गई। मुनीशा व उसके बेटे की हालत चिंताजनक बनी हुई है। सुबह अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित भी मौके पर पहुंचे। मृतका के भांजे पप्पू की तहरीर पर लूटपाट के दौरान हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह वह शब्द हैं जो नफीसा के मुंह से अर्द्धबेहोशी की हालत में उस समय निकल रहे थे, जब उसे घर से अलीगढ़ मेडिकल कालेज के लिए ले जाया जा रहा था। घर में अकेली सिर्फ मां-बेटी और बदमाशों की संख्या पांच से अधिक बताई जा रही थी। जब महिलाओं के सिर पर बदमाशों ने अंधाधुंध प्रहार करना शुरू किया तो वह अत्यधिक भयभीत हो गई। वह लगातार बदमाशों से यही कह रही थी कि मुझे और मेरी बेटी को छोड़ दो, जो ले जाना चाहो, वह ले जाओ।