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बरेलवी और देवबंदी भिड़े, फायरिंग

Tue, 26 Apr 2016 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/संभल
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देवबंदी-बरेलवी मसलक के लोग भिड़े
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नखासा थाना क्षेत्र के ख्वास खां सराय में स्थित नसीले वाली मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को एक बार फिर गर्मा गया। जब एक पक्ष ने मस्जिद का ताला तोड़कर अपना झंडा लगा दिया। बरेलवी और देवबंदी मसलक के सैकड़ों लोग आमने-सामने आ गए। टकराव के हालात बन गए।
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सूचना पर पहुंची पुलिस के सामने ही दोनों पक्षों के लोग आपस में भिड़ गए। खींचतान हुई। बवाल टालने के लिए पुलिसकर्मी दोनों के बीच खड़े रहे। इसी दौरान फायरिंग भी हुई। मामला बढ़ता देख तीन थानों की पुलिस कॉल कर ली गई। अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित भी मौके का दौरा किया है।

घटनाक्रम की शुरूआत सोमवार को दिन में दोपहर हुई। एक पक्ष ने ताला तोड़कर अपना झंडा लगा दिया। इस बात लेकर दूसरा पक्ष आ गया। दोनों में विवाद होने लगा। सूचना मिलते ही नखासा थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। दोनों पक्षों को अलग-अलग किया और बवाल टाला लेकिन जैसे ही घटना की खबर शहर में फैली दोनों पक्षों से लोग आने शुरू हो गए।
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भीड़ बढ़ने लगी। नखासा के थाना प्रभारी ने आला अधिकारियों से पुलिस बल मांगा। कोतवाली और हयातनगर थाने की पुलिस भेजी गई। तीन थानों की पुलिस और एएसपी के सामने ही दोनों पक्ष भिड़ने को तैयार थे। कई बार ऐसे मौके आए जब लोग आपस में खींचतान करने लगे। एक-दूसरे फिरके के इमाम के पीछे खड़े होकर नमाज पढ़ने को लोग राजी नहीं थी।

इस पर विवाद बना हुआ था। हालांकि अफसरों ने लोगों को समझाकर किसी तरह से नमाज अदा कराई। एहतियाती तौर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के साथ पीएसी की तैनाती की गई है। दोनों पक्षों को शांति व्यवस्था बनाए रखने का आदेश दिए।

मस्जिद को सील कर दिया गया है ताकि कोई भी पक्ष मस्जिद में प्रवेश न कर सके। विवाद को आपसी समझदारी से निबटाने के लिए प्रशासन ने  दोनों पक्षों को मौका दिया है। एसडीएम जेबी सिंह का कहना है कि यदि सोमवार की रात्रि तक दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद को नहीं निबटाया तो मंगलवार को कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी। 

देवबंदी मसलक के कुछ लोगों ने जब सोमवार को दोपहर नसीले वाली मस्जिद में प्रवेश किया तो बरेलवी मसलक के लोगों ने आपत्ति की। यहीं से विवाद तूल पकड़ गया। देवबंदी  मसलक के लोगों ने कहा कि मस्जिद को उनके द्वारा बनवाया गया है। हक उनका ही  है। जबकि बरेलवी मसलक के लोगों को कहना था कि न्यायाधिकरण के फैसले के हिसाब से मस्जिद का संचालन उनके हाथ में रहना है। फिर दूसरे पक्ष की दखलंदाजी का मतलब क्या है। इतना कहते ही पुराना विवाद एक बार फिर तूल पकड़ गया। 
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