चंदा की चांदनी में यमुना की तीरे, मस्ती से बंसरी बजाए धीरे धीरे। कन्हैया को एक रोज रोके पुकारा, कहा उनसे जैसा हूं अब हूं तुम्हारा। प्रेम विधा के भजनों की ऐसी प्रस्तुति मानो दर्शक दीर्घा में बैठे श्रोता पत्थर की मूर्ति बन गए हो। भगवान श्रीकृष्ण प्रेम में खोए श्रद्धालु भजनों में ऐसे खोए कि सुधबुध खोकर नाचने लगे।
परमार्थी आनंद के साथ आंखों में भावना के मोती तक नजर आए। भजन की पंक्ति के बाद लंबी आवाज में गोविंद का स्वर मानो मन से होते हुए आत्मा में उतर गया हो। संजीवनी पैलेस में आयोजित भजन संध्या में मंत्रमुग्ध कर देने वाले शब्दों के मोती भजन के रूप में ऐसे बिखरे कि माहौल भक्तिमय हो गया।
सबसे पहले दीप प्रज्वलित किया गया। विधि विधान से पूजन अर्चन के साथ शुभारंभ हुआ। मशहूर भजन गायक विनोद अग्रवाल का आयोजन समिति ने फूल मालाओं से स्वागत किया। श्रोताओं ने विनोद अग्रवाल के स्टेज पर आते ही फरमाइशों की झड़ी लगा दी।
एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति ने अपनी मनमोहक छटा बिखेरी। देर रात श्रद्धालु भजन संध्या में जुटे रहे। नवीन अग्रवाल, नितिन, विष्णु सेठ, विनीत गोयल, दिनेश अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अर्चना अग्रवाल, वंदना अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, अजीत जैन, इंजीनियर राजीव, राजकुुमार, महेंद्रा बजाज मौजूद रहे।