अगर किसान और कारोबारी मिलकर प्रयास करें और सरकार का साथ मिल जाए तो मैंथा इंडस्ट्री सिंथेटिक मैंथाल की चुनौती से निबट सकती है। वैसे तो इस चुनौती से निबटने के लिए तीन महीने पहल हुई थी और इसके संबंध में रामपुर और चंदौसी में बैठकें हो चुकी हैं।
इसी क्रम में मंगलवार को संभल में व्यापारियों, किसानों और वैज्ञानिकों ने मिलकर मंथन किया। मौका था किसान मेले का। किसान मेले में आयोजन मैंथा एसोसिएशन के बैनर तले किया गया। एसेंन्शियल ऑयल एसोसिएशन, इंडियन फेडरेशन अफ नेचुरल मैंथा प्रोड्यूर्स यूपी, केवी एरोमैटिक प्राइवेट लिमिटेड और मिंट एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने किया था।
इसमें रामपुर, संभल, अमरोहा, गजरौला, चंदौसी, बदायूं, दिल्ली के मैंथा कारोबारी और संभल जिले के किसानों के साथ सीमैप लखनऊ के वैज्ञानिकों ने विचार व्यक्त किए। मुख्य रूप से वक्ताओं ने कहा कि मैंथा की कोसी और शिवालिक प्रजातियों की खेती किसान करते हैं। अब नई सिम-क्रांति नामक नई प्रजाति आई है।
इस प्रजाति को अगर अगेती तकनीक से किया जाए तो लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। संचालन रामपुर के विष्णु कपूर ने किया। संभल मैंथा एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारियों में वीरेंद्र जैन, अरविंद अरोरा, आशुतोष रस्तोगी, दीपक गुप्ता, मोहम्मद अज्जत, सुरेंद्र गोयल, रोहित गुप्ता, हिमांशु अग्रवाल, दीपक गुप्ता, विनोद अग्रवाल आदि ने भाग लिया।
दिल्ली से एसी वार्ष्णेय, अजय जैन, राजीव अग्रवाल, चंदौसी से फूल प्रकाश, अतुल अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल ने भाग लिया। मंडी धनौरा से वैभव अग्रवाल ने विचार व्यक्त किए। कृषि वैज्ञानिकों में डा. जेआर बहल, डा. जेपी सिह, डा. संजय कुमार आदि ने नई तकनीक समझाई। जिलाधिकारी एनकेएस चौहान ने किसान मेले में भागीदारी की।