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हाईटेंशन लाइन टूटी, गृह स्वामी समेत दो की मौत

Wed, 24 Feb 2016 01:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल/जुनावई
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वर्षों से झुग्गी झोपड़ी में रहकर जिंदगी गुजारने वाले किसान शिशुपाल ने अपने पक्के मकान में रहने के सपने को साकार रूप देने के लिए भवन निर्माण शुरू कराया तो मंगलवार को ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन मौत बनकर गिर गई। जिसमें गृह स्वामी व राज मिस्त्री की मौके पर ही मौत हो गई। दो पशुओं की भी जान चली गई।
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गुन्नौर थाना क्षेत्र के बंधरई गांव में मंगलवार को पूर्वाह्न करीब 11 बजे शिशुपाल सिंह (50) पुत्र बहोरी सिंह अपने मकान का निर्माण करा रहा था। गांव का ही राज मिस्त्री नन्हे (30) पुत्र नरायण अन्य मजदूरों के साथ भवन की चिनाई कर रहा था। जहां निर्माण हो रहा है, उसके ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, जो काफी जर्जर भी हो चुकी है।


बताते हैकि भवन निर्माण के समय ही अचानक हाईटेंशन लाइन का एक तार टूटकर राजमिस्त्री नन्हे के ऊपर गिर गया। तार घूमा तो किनारे खड़ा गृह स्वामी शिशुपाल सिंह भी चपेट में आ गया। तार का घुमाव इतना तेज हुआ कि देखते ही देखते दोनों में आपस में सट गए।
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हाईवोल्टेज करेंट के कारण दोनों के शरीर से चिंगारियां निकलने लगी। यहां अफरा तफरी मच गई। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि झुलसते दोनों लोगों की आखिर मदद करें भी तो कैसे, क्योंकि पानी डालने पर भी करेंट फैलने का खतरा था। लोगों के रेत आदि डालने का प्रयास किया लेकिन कुछ ही पलों में दोनों के शरीर बुरी तरह झुलस गए।


उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यही नहीं पड़ोसी किसान नत्थू सिंह यादव के बैलों और भैंसों के ऊपर भी वही तार जाकर गिरा। जिससे बैल तो बच गए लेकिन भैंस मौके पर ही मर गई। विद्युत विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई लेकिन करीब घंटेभर बाद सप्लाई को बंद किया जा सका। पूरे गांव में खलबली मच गई।


सूचना मिलने पर गुन्नौर थाना प्रभारी राजदीप सिंह यादव व पतरिया चौकी प्रभारी रविंद्र यादव मौके पर पहुंचे। पंचनामा भरकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय पर भेज दिया गया। इस घटना को लेकर खादी ग्रामोद्योग के उपाध्यक्ष प्रदीप यादव के भाई राम यादव ने मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया।   


अभी सालभर पहले ही राजमिस्त्री नन्हें की शादी हुई थी। महीनेभर पहले ही उसके घर बेटे की किलकारी गूंजी थी। अपनी वैवाहिक जिंदगी से वह काफी खुश था। किसी तरह लोगों के आशियाने खड़े करके अपने परिवार का जीविकोपार्जन का जुगाड़ कर रहा था। लेकिन अब उसकी मौत के बाद घर का संचालन भी गड़बड़ा जाएगा। नन्हें की पत्नी बबिता का रोते रोते बुरा हाल है।


शिशुपाल व उसके परिवार की जिंदगी झुग्गी झोपड़ी में ही कट रही थी। उसके बुजुर्ग भी झोपड़ियों में ही गुजर बसर करते आए हैं। मृतक शिशुपाल की पत्नी हरप्यारी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। सिसकते शब्दों में कहती है कि वर्षों से झोपड़ी रहकर समय काट रहे थे। सपना था कि कुछ पैसे हो जाएं तो पक्का मकान बनाकर रहेंगे। लेकिन उसका यह सपना पूरा होने ही वाला था कि ईश्वर ने उसकी जिंदगी ही छीन ली। दो नाबालिग बच्चे हैं।
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