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क्षत्रिय नेता पिंटू ठाकुर की हत्या का खुलासा, एक शार्प शूटर गिरफ्तार

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चंदौसी। अट्ठारह दिन के बाद आखिरकार, बनियाठेर थाना पुलिस ने चंदौसी में दिन दहाड़े हुए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (युवा) के जिला उपाध्यक्ष मोनपाल सिंह उर्फ पिंटू ठाकुर की हत्या का खुलासा कर दिया है। एक शार्प शूटर को गिरफ्तार किया गया है। जबकि तीन शूटर समेत छह हत्यारोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
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20 मई 2019 को मोनपाल सिंह उर्फ पिंटू ठाकुर निवासी गांव जरगांव व हाल निवासी शक्तिनगर चंदौसी की उस समय कार रोक कर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपने एक साथी अधिवक्ता के साथ चंदौसी से अपने गांव जरगांव जा रहे थे।
उस समय ताहरपुर सिमरौवा व हाल निवासी जरगांव संतपाल सिंह, जो जेल में है, उसके भाई सतीश उर्फ रिंकू, जरगांव के ग्राम प्रधान योगेंद्र सिंह व उसके भाई पुष्पेंद्र सिंह सहित सात लोगों को नामजद किया गया था। अपर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस की तफ्तीश में पाया गया कि पिंटू ठाकुर की हत्या भाड़े के हत्यारों से कराई गई है। सर्विलांस और पूछताछ में मिले साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि हत्या की घटना स्थल पर चार लोग मौजूद थे, जो सभी किराये के शूटर थे। सभी रामपुर जिले के पटवाई थाना क्षेत्र के पाए गए हैं।
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इसमें एक पटवाई थाने के बकैनिया गांव निवासी विजय को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, छह कारतूस जिंदा व बाइक बरामद किया गया। उसने पूछताछ में बताया कि जरगांव के प्रधान योगेंद्र सिंह व उसके भाई पुष्पेंद्र सिंह से पिंटू ठाकुर की प्रधानी की व 80 बीघा जमीन पर कब्जे को लेकर रंजिश चल रही थी। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे।
इससे पहले कि पिंटू ठाकुर, प्रधान को मौत के घाट उतारे, उससे पहले ही योगेंद्र सिंह ने अपने भाई के साथ मिलकर अपने घर में काम करने वाले आपराधिक प्रवृत्ति के विक्की निवासी बिल्सी (बदायूं) के साथ मिलकर पिंटू ठाकुर की हत्या की योजना बनाई। विक्की ने विजय समेत अपने तीन साथी बुलाए। आरोप है कि तीन लाख रुपये की सुपारी दी। इसके बाद 20 मई को पिंटू ठाकुर की हत्या को अंजाम दिया गया। ग्राम प्रधान से ईट भट्ठे को खरीदने की रंजिश भी बताई जा रही है। जिस भट्ठे को पिंटू खरीदना चाहता था, उसी भट्ठे को योगेंद्र सिंह के भाई ने खरीद लिया था।

एक महीना पहले ही मुरादाबाद में होनी थी पिंटू ठाकुर की हत्या
चंदौसी। बनियाठेर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बताया कि जरगांव के प्रधान योगेंद्र सिंह व उसके भाई पुष्पेंद्र सिंह ने अपने घर पर काम करने वाले विक्की की मदद से चार शूटरों को महीने भर पहले ही सुपारी दे दी। चारों शूटर दस दिनों तक मुरादाबाद में लाकड़ी फाजलपुर में किराये का कमरा लेकर रहे। चंदौसी से लेकर मुरादाबाद तक पिंटू ठाकुर के आने जाने पर लगातार नजर रखी गई, लेकिन मौका हाथ नहीं आया। तब 18 मई को चारों शूटर चंदौसी आए। यहां प्रगति बिहार में किराये का कमरा लेकर रहना शुरू कर दिया। 20 मई को भी सुबह से ही पिंटू ठाकुर पर नजर रखी गई। जैसे ही जानकारी मिली कि पिंटू ठाकुर जरगांव की ओर निकलने वाला है, वैसे ही गुमथल मोड़ पर शूटरों ने अपना जाल बिछा दिया।

पुलिस जांच में साफ बच गए दो नामजद भाई
चंदौसी। पिंटू ठाकुर की हत्या में ताहरपुर सिमरौआ गांव निवासी संतपाल सिंह व उसका भाई सतीश उर्फ रिंकू साफ बच गया है। जबकि परिजनों के अनुसार सीधे तौर पर संतपाल सिंह पर ही जेल में बैठकर पिंटू ठाकुर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
जरगांव में रह रहे संतपाल सिंह गांव में ही सरस्वती इंटर कालेज में प्रधानाचार्य था। पिंटू ठाकुर का दोस्त था लेकिन जिला पंचायत के चुनाव में जब पिंटू को यह जानकारी मिली कि उसके दोस्त संतपाल सिंह ने उसे हराने का प्रयास किया तो दोनों के बीच दुश्मनी शुरू हो गई थी।
इसके बाद दोनों के बीच कई बार विवाद हुआ। पिंटू की गवाही वाले एक दुष्कर्म के मामले में संतपाल अभी जेल में हैं। एक बार जमानत हुई लेकिन बदायूं में उसके खिलाफ जानलेवा हमले के आरोप में मुकदमा लिख गया तो उसकी जमानत निरस्त हो गई थी। लेकिन पुलिस की जांच में यह पूरा मामला जरगांव के प्रधान योगेंद्र सिंह पर केंद्रित हो गया। संतपाल सिंह व उसके भाई की संलिप्तता सामने नहीं आई है। हालांकि पुलिस का दावा है कि अभी संतपाल व उसके भाई की कोई भूमिका इसमें थी या नहीं, इसकी जांच चल रही है।
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