पड़ताल : उज्ज्वला की ‘गैस’ निकाल रहे दलाल
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में घूसखोरी और दलाली की शिकायतें
उज्ज्वला योजना मोदी सरकार की ऐसी बहुप्रचारित योजनाओं में एक है जिसके आधार पर भाजपा ने हाल के चुनावों में वोट मांगे। योजना के माध्यम से गरीब माताओं को लकड़ी के चूल्हे से उठे धुएं और राख से बचाने का दावा बढ़चढ़कर किया गया। अमर उजाला ने जब उज्ज्वला योजना की पड़ताल की तो इसका स्याह पक्ष सामने आया। योजना के लाभार्थियों से घूसखोरी और दलाली की शिकायतों के बीच यह भी तथ्य सामने आया कि योजना में दिए जाने वाले सिलिंडर मुफ्त नहीं हैं। खुद एजेंसी संचालकों ने इसकी तस्दीक की। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गृहणियों के लिए रसोई गैस का कनेक्शन निशुल्क दिलाने के नाम पर बिचौलियों ने कई स्थानों पर वसूली की है। लाभार्थियों से बातचीत में इसका खुलासा हुआ है लेकिन हैरत की बात यह है कि वसूली के मामलों में लिखित तौर पर कोई शिकायत न आने की बात कहकर जिम्मेदार अधिकारी अपना बचाव कर रहे हैं। पीड़ितों ने लिखित शिकायत कर अपना रुपया वापस नहीं मांगा है। उज्ज्वला का एक और पक्ष सामने आया कि निशुल्क प्रचारित इस योजना में एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक निश्चित धनराशि देनी पड़ती है।
जनपद संभल उज्ज्वला योजना के प्रभारी भारत गैस के विक्रय अधिकारी हिमांशु जैन ने बताया कि जनपद संभल में 1,94,000 लोगों ने रसोई गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किए थे। चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले तक सत्यापन के बाद 1,29,000 कनेक्शन जारी किए गए। मार्च 2019 से योजना बंद है। अब नए आदेश आने पर कनेक्शन खुलेंगे। उन्होंने बताया बताया कि अवैध वसूली का कोई मामला उनके सामने नहीं आया है। अगर आता है तो कार्रवाई करेंगे। उनके मुताबिक रसोई गैस की कीमत और चूल्हे के 990 रुपये लाभार्थी से लिए जाने का नियम है। लेकिन अगर लाभार्थी के पास यह रुपये नहीं हैं तो उसे इस राशि का ऋण मंजूर हो जाता है जो कनेक्शन जारी होने के बाद तब किस्तों में वसूल होती है। जब उपभोक्ता के रसोई गैस सिलिंडरों की छह रिफिल पूरी हो गई हों।
उज्ज्वला योजना में 2300 रुपये देकर बिचौलिए के जरिए कनेक्शन मिल गया है लेकिन बिचौलिए ने कनेक्शन का बीमा कराने के नाम पर उनके कागज ले लिए हैं। अब रसोई गैस को कैसे बुक कराएं, समझ में नहीं आ रहा है। अगर जांच कराई जाए तो पूरी हकीकत सामने आएगी।
नफीसा, निवासी ओबरी, उज्ज्वला योजना की लाभार्थी।
उज्जवला योजना अंतर्गत गैस कनेक्शन के लिए गैस एजेंसी संचालक को जरूरी कागजात दिए थे। दो साल से अधिक का समय बीत चुका है। चक्कर लगाते-लगाते थक गई। दूसरी एजेंसी से संपर्क किया तो मालूम पड़ा कि उसके नाम का कनेक्शन जारी हो चुका है। अब वह इधर-उधर धक्के खाने को मजबूर है।
रेशमा, निवासी गांव रचैटा।
गैस कनेक्शन योजना की पात्रता सूची में नाम आने की जानकारी देने मेरे घर एक बिचौलिया पहुंचा। उसने आधार कार्ड, बैंक पासबुक तथा दो फोटो और 3,000 रुपये लेकर गैस चूल्हा सिलिंडर दिया। आखिर ऐसा क्यों हुआ। सरकारी अधिकारी इसकी जांच कराएं ताकि आगे किसी से वसूली न हो।
हनीफा, निवासी ओबरी।
उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन की कॉपी तथा सामान दिलाने के नाम पर हमसे 2100 रुपये की वसूली की गई। एजेंसी संचालक व बिचौलिए के बीच सांठगांठ न होती तो ऐसा न होता। इस मामले में हकीकत की तह तक जाने के लिए जांच कराई जाए।
नाजमां, निवासी ओबरी।