संभल। दिसंबर का अंतिम सप्ताह कड़ाके की सर्दी के साथ बीत रहा है। सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन बढ़ गई है। धूप भी राहत नहीं दे रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 9 और अधिकतम तापमान 20 डिग्री दर्ज किया गया। बृहस्पतिवार की रात को भी घना कोहरा छाने से दृश्यता शून्य रही।
15 दिसंबर के बाद से लगातार सर्दी बढ़ रही है। तापमान में भी गिरावट लगातार जारी है। सर्द मौसम का असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। प्रशासन ने रैन बसेरे और अलाव की व्यवस्था की है। यह व्यवस्था प्रमुख चौराहों पर तो दिखाई दे रही है लेकिन शहर के अंदर गली मोहल्ले में कहीं अलाव नहीं दिख रहे।
नगर पालिका द्वारा मुरादाबाद मार्ग पर स्थायी रैन बसेरा बनाया हुआ है। अस्थायी रैन बसेरा रोडवेज पर बनाया है, जहां तीन लोगों के ठहरने की व्यवस्था है लेकिन इन दोनाें ही रैन बसेरों में कोई नहीं रुक रहा।
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सांसों पर प्रदूषण का संकट, एक्यूआई 240
शुक्रवार को 240 एक्यूआई दर्ज किया गया। एक तरफ सर्दी का सितम और दूसरी ओर प्रदूषण का बढ़ना सेहत पर सीधा असर कर रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शाने रब ने बताया कि इस मौसम में दिल के रोगियों के लिए खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर बुजुर्ग इस मौसम में सावधानी बरतें। सर्दी के साथ प्रदूषण बुजुर्गों के लिए खतरा बन जाता है।
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पिछैती आलू के लिए कोहरा और पाला खतरा
संभल प्रदेश में तीसरे नंबर का जिला है जहां आलू की पैदावार और कारोबार दोनों होते हैं। आगरा पहले और फिरोजाबाद दूसरे नंबर पर रहते हैं। इस बार संभल में करीब दो हजार हेक्टेयर खेती आलू की होने का अनुमान है। अगेती आलू की तो खोदाई चल रही है। पिछैती आलू की खोदाई जनवरी के अंतिम सप्ताह में होगी। इसलिए झुलसा रोग का खतरा है। किसान अब चिंतित हैं क्योंकि पिछले 15 दिनों में मौसम में सुधार नहीं हुआ बल्कि कोहरा और पाला बढ़ा है। इसी तरह तोरई, मिर्च, लोकी, सेम, आल प्याज की फसल को कोहरा और पाला प्रभावित कर रहा है।
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छुट्टा पशु भी
जहां एक तरफ सर्दी से लोग कांप रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर बेजुबान पशुओं के बैठने का भी सहारा नहीं है। तमाम छुट्टा पशु सड़कों पर बेसहारा घूमते दिखाई दे रहे हैं। घने कोहरे के दौरान इन पशुओं के साथ वाहन चालकों के लिए भी खतरा रहता है। आश्रय स्थलों तक यह पशु नहीं पहुंचाए जा रहे।
संभल में कोहरे के बीच लाइटें जलाकर गुजरते वाहन। संवाद