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पीएचसी में सर्दी, खांसी और बुखार का इलाज, कोरोना भूले

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संभल। जिले में कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर सतर्कता है। इसके बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बुरा है। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरायतरीन में सिर्फ सर्दी, जुकाम और खांसी-बुखार का उपचार ही मरीजों को मिल रहा है। यदि किसी को कुछ जांच करानी है तो उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। अहम बात यह है कि यहां डाक्टर का पद तो स्वीकृत है लेकिन पोस्टिंग नहीं है। फार्मासिस्ट ही मरीजों को देखकर दवा लिख रहे हैं।
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कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रान के मरीज भारत में दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। जिसके चलते जिले में भी सतर्कता बरती जा रही जा रही है। लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं नहीं हैं। इसको लेकर जिम्मेदान भी मौन हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति यह है कि कहीं सीएचसी, पीएचसी में डॉक्टरों की कमी है तो कहीं पर दवाओं का टोटा और कहीं-कहीं पर जांच की कोई सुविधा नहीं है।
हयातनगर में करीब साठ हजार की आबादी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरायतरीन की स्थापना 2014 में की गई। लेकिन अफसोस मरीजों को देखने के लिए डाक्टर की तैनाती नहीं हुई। फार्मासिस्ट मनोज कुमार ही पर्चा लिखकर दवाई दे देते हैं। मनोज कुमार बताते हैं कि उनके साथ दो स्टॉफ नर्स अर्चना सैनी और शालिनी हैं। एक लैब टेक्नीशियन भी है। हर रोज 50 से 60 ओपीडी हो जाती हैं। इनमें कई केस ऐसे होते हैं कि इमरजेंसी में उनको जिला अस्पताल या फिर अन्य जगह की दौड़ लगानी पड़ती है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दवाई लेने आते हैं तो सिर्फ दवाई मिलती है। यदि कोई जांच कराने की जरूरत पड़ जाए तो वहां जांचें नहीं होतीं। जांच कराने के लिए या तो संभल जिला अस्पताल जाना पड़ता है या फिर निजी लैब पर महंगे दामों पर जांच करानी पड़ती है।
मोहम्मद फाजिल, मोहल्ला चकली, सरायतरीन
पीएचसी में सिर्फ जाड़ा, बुखार और सर्दी, जुकाम की दवाई मिल पाती है। जांच तो किसी बीमारी की हो ही नहीं पाती। कहने पर कर्मचारी दूसरे स्थानों पर जाकर जांच कराने के लिए कहते हैं।
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मुन्ना, अमानखेल, सरायतरीन
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