राज्य सरकार की उपलब्धियों का साहित्य और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चित्रों वाले कलेंडरों की संभल में दुर्गति सामने आई है। यह साहित्य वर्ष 2015-16 में जनता के बीच वितरण के लिए सूचना विभाग ने प्रकाशित किया था लेकिन पहुंच गया रद्दी के साथ कबाड़ी की दुकान पर।
इसका खुलासा जिलाधिकारी के सामने बुधवार को शाम उस समय हुआ जब वह संभल के नाला मोहल्ले में हुए बवाल के बाद मौका मुआयना करने गए थे। कबाड़ के कारोबारी शमशाद के घर पर रद्दी और स्क्रैप के साथ ही कलेंडर और साहित्य रखा हुआ था। 300-400 कलेंडर थे और 1000 से अधिक पुस्तकें थीं जिसमें अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों का बखान किया गया था।
जिलाधिकारी ने जब शमशाद से पूछा कि यह साहित्य कबाड़ तक कैसे आया? शमशाद ने जवाब दिया कि कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद से उनके रिश्ते अच्छे हैं और उन्होंने वितरण के लिए यह साहित्य दिलवाया था जिसे वह वितरित कर रहे थे। जहां तक कबाड़ की दुकान में साहित्य रखे होने का सवाल है?
दुकान से वितरण आसानी से किया जा सकता है, इसलिए इसे दुकान में ही रखा गया है। जिलाधिकारी इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि तत्काल साहित्य को अपने कब्जे में लें और सूचना विभाग के माध्यम से वितरण कराएं। इसके बाद दुकान से सभी कलेंडर और किताबें अधिकारियों ने अपने कब्जे में लीं।
नवाब इकबाल महमूद, कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश, सरकार ने कहा शमशाद को मैंने कोई कलेंडर और साहित्य नहीं दिया है। हो सकता है कि वह पार्टी समर्थक हों और किसी ने उन्हें वितरण की जिम्मेदारी दी हो। मैं तो यही कहूंगा कि उन्हें मुख्यमंत्री के चित्रों वाले कलेंडर कबाड़ के आसपास नहीं रखने चाहिए थे।