अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में रहने वाले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने गुरुवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को एक नई सलाह दे डाली। उन्होंने कहा कि देश के नौ स्थान ऐसे हैं, जहां पर कुछ इतिहासकारों ने मंदिर तोड़कर मजिस्द बनाए जाने की बात कही है, ऐसे विवादित स्थलों पर नमाज बंद होनी चाहिए क्योंकि किसी विवादित स्थल पर नमाज का कोई औचित्य नहीं है।
वह गुरुवार को सिरसी आए थे। इस दौरान अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने राममंदिर मसले पर अपनी राय को एक बार फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि जिसे बाबरी मस्जिद कहा जा रहा है, वह सुन्नियों की मस्जिद नहीं शियाओं की है। हम मस्जिद को अपना मानते हैं। हम इससे संबंधित मुकदमे में पक्षकार हैं और हमने हिंदू पक्षकारों से बातचीत करते हुए एक समझौता दाखिल किया है जिसमें अयोध्या और उसके परिक्रमा में क्षेत्र में कोई भी मस्जिद न बनाने का फैसला लिया है। जैसा कि हम इतिहासकारों के हवाले से सुनते आ रहे हैं कि अयोध्या में मंदिर तोड़कर मजिस्द बनाई गई थी। लिहाजा ऐसी मस्जिद में नमाज उचित नहीं है।
हम चाहते हैं कि अयोध्या का विवादित स्थल हिंदुओं को सौंप दिया जाए। हमें कहीं और जगह दी जाए जहां पर मस्जिद ए अमन बन सके। हम उन मुगल शासकों के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनाना चाहते जिनका इतिहास भारतीयों के लिए काला रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में काशी, मथुरा, अयोध्या में विवादित स्थल हैं। मध्य प्रदेश के विदिशा तथा गुजरात में व दिल्ली में एक मस्जिद है जिसे विवादित माना गया है। मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड को चाहिए कि वक्फ बोर्ड के काम में दखलअंदाजी बंद करते हुए ऐसे विवादित स्थलों पर नमाज बंद कराई जानी चाहिए। मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड को अपनी जिम्मेदारी निभाए। वक्फ बोर्ड के काम में हस्तक्षेप न करे। मस्जिदों के मसले वक्फ बोर्ड तय करेगा। शरीयत के हिसाब से नमाज कराना, पर्सनल लॉ बोर्ड का काम है।
हलाला करने और कराने वालों को सजा मिली चाहिए
संभल। संभल की समीना की ओर सुप्रीम कोर्ट में हलाला और मुस्लिम बहुविवाह पर दाखिल याचिका का हवाला देने पर शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जो लोग हलाला कर रहे हैं या करा रहे हैं दोनों के खिलाफ भारतीय दंड विधान के तहत कार्रवाई जाए। उन्हें सजा दी जाए लेकिन बहुविवाह के मामले में वह शरीयत का पालन करने के पक्षधर हैं।