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चंदौसी मंडी समिति में ई-लैब स्थापित

Mon, 27 Nov 2017 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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चंदौसी मंडी समिति में ई-नेम योजना के लैब को देखते व्यापारी - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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अब व्यापारी घर बैठे प्रदेश की किसी भी मंडी से अनाज की खरीद फरोख्त कर सकेंगे। चंदौसी कृषि उत्पादन मंडी समिति को ई-नेम परियोजना से जोड़ दिया गया है। खाद्यान्न की जांच के लिए यहां ई-लैब स्थापित की गई है, जहां खाद्यान्न की विभिन्न प्रकार की जांच तत्काल हो सकेगी। हालांकि अभी प्रचार प्रसार की कमी के कारण चंद व्यापारी ही इससे जुड़ सके हैं।
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कृषि उत्पादन मंडी समिति में ई-नेम परियोजना का शुभारंभ तो कई माह पहले ही हो चुका है लेकिन अभी तक ई-प्रयोगशाला स्थापित न होने से फसल की गुणवत्ता नहीं परखी जा सकती थी लेकिन अब कार्यालय के एक कक्ष में ई-नेम प्रयोगशाला में सुचारु रूप से काम शुरू हो गया है। इस प्रयोगशाला में किसान खाद्यान्न व सब्जी के नमूने के लिए जाएंगे, जिसकी ग्रेडिंग इंस्पेक्टर द्वारा की जाएगी। जांच के बाद फसल की गुणवत्ता निर्धारित की जाती है। उसके आधार पर फसल की ई- ट्रेडिंग कराई जाती है। जांच के बाद प्रयोगशाला द्वारा किसान को ग्रेडिंग का प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है।

साथ ही इसे ऑनलाइन कर दिया जाता है जिससे प्रदेशभर के व्यापारी ऑनलाइन फसल की गुणवत्ता देखकर इसके लिए खरीद सकें। फसल की जांच के लिए प्रयोगशाला में भौतिक तुला, नमी मापक यंत्र, अनाज विभाजक यंत्र, ओवन, सिली का जेल, कंप्यूटर, वर्नियर कैलीपर्स आदि मौजूद हैं। इन यंत्रो के द्वारा फसल की जांच कर गुणवत्ता तय की जाती है। अभी किसान व व्यापारी इसमें खास दिलचस्पी नहीं ले रहा है। शनिवार को संदीप अक्षत, राकेश पाठक आदि कई व्यापारी देखने पहुंचे।
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-ई-नेम प्रयोगशाला में प्रतिदिन 12-15 लाट की ग्रेडिंग की जा रही है। ग्रेडिंग के बाद किसान को इसका प्रमाणपत्र भी दिया जाता है। धीरे-धीरे किसान व व्यापारी इसमें रुचि लेने लगा है।
-अशोक कुमार, ग्रेडिंग इंस्पेक्टर, ई-प्रयोगशाला मंडी समिति, चंदौसी

किसान व व्यापारी नहीं ले रहा खास दिलचस्पी
चंदौसी। क्षेत्रीय किसान व व्यापारी ई-नेम परियोजना में अभी दिलचस्पी नहीं ले रहा है। इसके पीछे कई कारण है कि पहला तो यह है कि वह इस परियोजना के तहत फसल बेचते हैं तो उनको फसल का मूल्य नगद न मिलकर बैंक खाते के माध्यम से मिलता है। जबकि काफी संख्या में ऐसे किसान है जो मंडी में फसल बेचकर तुरंत बाजार जाते है और घर की आवश्यकता की चीजे खरीदतें है। जबकि खाते से धनराशि मिलने में कई दिन लग सकते है। व्यापारी योजना के माध्यम से खरीद फरोख्त से अभी बच रहा है। क्योंकि वह भी इस हाथ दे उस हाथ ले वाले फार्मूले पर चलना चाहता है। उसे किसान को बैंक से भुगतान करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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