संभल। साइबर अपराध मामले में कोतवाली क्षेत्र के लाडम सराय निवासी विकास और उसके बहनोई मैनाठेर थाना क्षेत्र के महमूदपुर निवासी राजपाल के खिलाफ सीबीआई को पुख्ता सबूत मिले हैं। परिजनों ने बृहस्पतिवार को मुलाकात करने का प्रयास किया लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। सीबीआई की टीम की ओर से कहा गया है कि जमानत करानी पड़ेगी। साले-बहनोई पर म्यूल एकाउंट उपलब्ध कराने का आरोप है। इन म्यूल एकाउंट में करोड़ों रुपये का लेनदेन भी किया गया है।
विकास के भाई कपिल ने बताया कि उनके भाई और बहनोई को एक साथ गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की टीम दिल्ली ले गई है। कहा है कि इन दोनों के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े सबूत मिले हैं। यह साइबर अपराध से जुड़े गिरोह के सदस्य हैं। कपिल का कहना है कि उनका भाई जींस कारखाना कई वर्षों से चला रहा है। बहनोई मेडिकल स्टोर चलाते हैं। दो वर्ष पहले खाते में 2.50 करोड़ रुपये आए थे। वह खाता सीज कर दिया गया था। मालूम हो बुधवार की सुबह सीबीआई की टीम विकास के घर पहुंची थी। दोपहर तीन बजे तक पूछताछ के बाद साथ ले गई थी। इस पूछताछ के दौरान परिजनों को दूर रखा गया।
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राजपाल के दोस्त ने इस अपराध में फंसाया, लालच देकर खाते खुलवाए थे
- विकास के परिजनों का कहना है कि कुंदरकी थाना क्षेत्र के अब्दुल्लापुर निवासी एक युवक राजपाल का दोस्त है। उसने ही कई वर्ष पहले तीन से चार हजार रुपये का लालच देकर खाते खुलवाए थे। अन्य परिचित लोगों को भी खाते खुलवाने के लिए लालच दिया था। विकास के परिजनों का कहना है कि खाते में जो गड़बड़ी की है वह राजपाल के दोस्त ने की है। जो भागा हुआ है। वह गिरफ्तार होना चाहिए। उसने ही लालच में लेकर फंसा दिया है। म्यूल एकाउंट उसने ही खुलवाए हैं। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
म्यूल अकाउंट क्या है
- एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल अपराधी अवैध गतिविधियों, जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी या अन्य वित्तीय अपराधों के लिए करते हैं। ये खाते आमतौर पर ऐसे लोगों द्वारा खोले जाते हैं जो या तो जानबूझकर या अनजाने में अपराधियों की मदद करते हैं। इस खाते में अवैध स्रोतों से प्राप्त धन को भेजा जाता है और फिर उसे अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता है। जिससे पैसों का स्रोत छिप जाता है और कानूनी जांच में मुश्किल होती है। अपराधी अक्सर लोगों को लुभावने ऑफर देकर अपने खाते इस्तेमाल करने के लिए तैयार कर लेते हैं।
- लालच में लेकर म्यूल अकाउंट खुलवाने वाले अपराधी अकाउंट को ऑपरेट खुद करते हैं। एटीएम व चेक बुक तक अपने पास रख लेते हैं। जिससे रुपये को वह अपनी मर्जी से निकाल सकें। कई बार अपराधी नंबर भी नया लेकर लगाते हैं। जिसको खुद चलाते हैं।जिससे अकाउंट होल्डर तक कोई सूचना न पहुंचे।