संभल में श्री कल्कि धाम में गर्भगृह में माथा टेकने पहुंचे स्वामी रामभद्राचार्य ।बसंवाद
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संभल। ऐंचोड़ा कंबोह में चल रही सात दिवसीय श्री कल्कि कथा का रविवार को समापन हो गया। तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य जी महाराज ने अंतिम दिन भगवान कल्कि के द्वारा पापियों के विनाश की कथा सुनाई। कहा कि संभल को राजधानी बनाकर भगवान ने पापियों का नाश किया। इसके बाद सतयुग की शुरुआत का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्री कल्कि कथा में प्रवचन करते हुए तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने विस्तार से भगवान कल्कि का अर्थ बताया। कहा कि भगवान कल्कि को विवाह के बाद जय और विजय दो संतानों की प्राप्ति हुई। वह हरिद्वार गए और गंगा जी में स्नान किया। यहां सभी मुनि देखने आए। चंद्रवंश के राजा मरु और सूर्यवंश के राजा देवापि भी आए। भगवान कल्कि ने यहां विश्वामित्र को बुलाया और रामचरित मानस की कथा सुनने की इच्छा जताई।
बताया कि मैं रामचरित मानस कथा के आधार पर शासन करूंगा। इस पर राजा मरु ने उन्हें रामचरित मानस की कथा सुनाई। कथा को ध्यान से सुनने के बाद उन्होंने अपना राज्य संभाला और इस राज्य की राजधानी संभल बना। रामभद्राचार्य ने विस्तार से पापियों के नाश की कथा सुनाई। इसके बाद सतयुग शुरू होने का प्रसंग सुनाया और कथा को विराम दिया। इस दौरान भगवान कल्कि के जयकारे गूंज उठे।