संभल। फिल्म स्टार सलमान खान पर काले हिरन के शिकार का मामला दर्ज हुआ तो पूरे देश में काले हिरन की चर्चा हुई थी। राजस्थान के विश्नोई समाज की पहल पर बचाव के प्रति जागरूकता पैदा हुई थी लेकिन जैसे-जैसे मामला ठंडा पड़ा तो जागरूकता भी कम होती चली गई। वन्य जीव संरक्षण के लिए गंभीर पहल नहीं हुई। इसका असर संभल जनपद पर भी है।
जिले में करीब 150-200 काले हिरन हैं। इनकी जान को खूंखार कुत्तों से खतरा है। खूंखार कुत्तों के हमले में तीन वर्ष के भीतर 19 काले हिरन मारे गए पर शासन-प्रशासन और वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने ऐसी कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की जिससे दुर्लभ प्रजाति के हिरनों का संरक्षण किया जा सके।
बदायूं और अमरोहा की सीमा से लगे करीब 100 वर्ग किलोमीटर इलाके में काले हिरन के झुंड देखने को मिलते हैं। इनके लिए कोई रिजर्व फारेस्ट जनपद में नही है। खेतों तथा नदियों के आसपास की खाली जमीन पर हिरन रहते हैं। बदायूं और अमरोहा की सीमा से लगे इलाके में काले हिरन की दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है। हिरनों की गणना तो वन विभाग के पास भी नहीं है लेकिन क्षेत्र के लोगों ने हिरनों के तमाम झुंड देखे हैं और उसके हिसाब से उनकी संख्या करीब 150-200 तक होने का अनुमान लगाया गया है।
किन हिरनों पर हमला करते हैं खूंखार कुत्ते
अपने झुंड से किसी कारण अगर हिरन बिछड़ जाता है तो उसे खूंखार कुत्ते अपना शिकार बनाते हैं। जिन खेतों में पानी के साथ कीटनाशक डाला गया है और अगर उस खेत का पानी हिरन पी लेते हैं तो हिरने सुस्त पड़ने लगते हैं और कुत्तों का शिकार हो जाते हैं।
इस साल कितने हिरनों हुए कुत्तों का शिकार
वर्ष 2019 में खूंखार कुत्तों के हमले में इन तारीखों में गई 9 काले हिरनों की मौत हुई
वर्ष 2020 में 5 हिरनों की मौत हुई
वर्ष 2021 में भी 5 काले हिरनों को कुत्तों ने अपना निवाला बनाया
खूंखार कुत्ते काले हिरन का शिकार करते हैं। इसके के लिए जनवरी में ग्रामीणों को जागरूक किया गया है। मैंने और डीएफओ ने भी क्षेत्र का दौरा किया था लेकिन यहां हिरन के लिए कोई चिह्नित क्षेत्रफल नहीं है। न ही कोई रिजर्व फारेस्ट है। इसलिए अलग से कोई कार्ययोजना बनाए जाने की स्थिति नहीं है। ईश्वर चंद्र सिंह, उप प्रभागीय वन अधिकारी संभल
हिरन के संरक्षण के लिए क्या करे प्रशासन
खेत-खलिहान के अवैध कब्जे चिह्नित किए जाएं
झील और तालाब पुनर्जीवित किए जाएं
खेतों के चारों ओर लगाए कंटीले तार हटाए जाएं
लुप्त प्राय वन्य जीव है काला हिरन
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर, आईयूसीएन) ने काले हिरन को लुप्त प्राय वन्य जीव की सूची में शामिल किया है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में भी काले हिरण को लुप्त प्राय वन्य जीव की श्रेणी में रखा गया है।
यह हमारे लिए गर्व की बात है कि जिले में करीब 200 हिरन पाए जाते हैं। हिरन बचाने के लिए सरकारी अधिकारी कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जो काले हिरन कुत्तों के हमले में मारे जाते हैं उनका पोस्टमार्टम कराने के बाद वन विभाग फिर अपने काम में व्यस्त हो जाता है। सेमुअल सिंह, सदस्य, वाइल्ड लाइफ प्रजर्वेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया
खेतों में कीटनाशक का प्रयोग किए जाने से मारे जा रहे हैं हिरन
फसल में कीटनाशक का उपयोग न करें। कीटनाशक युक्त पानी पीने से हिरन बीमार होते हैं और कई बार बेहोश हो जाते हैं। मौके का फायदा उठाकर खूंखार कुत्ते हमला कर देते हैं।
डा. नीरज गौतम, पशु चिकित्सा अधिकारी