मरे हिरन का परीक्षण करते डाक्टर।
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संभल। संभल-गवां मार्ग पर रझेड़ा-सलेमपुर गांव के पास वाहन की टक्कर से काले हिरन की मौत हो गई। सोमवार की सुबह सड़क पर उसे मरा देखकर लोगों ने पुलिस और वन विभाग को इत्तला दी। इसके बाद वन विभाग ने सौंधन में पशु चिकित्सक से शव का पोस्टमार्टम कराया है।
संभल जिले में कैला देवी और शाकिनशोभापुर के इलाके में दुर्लभ प्रजाति के 100 से अधिक काले हिरन हैं। इनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। जबकि खूंखार कुत्ते आएदिन इन पर हमला करते हैं। तीन काले हिरन 31 जुलाई को खेतों में लगाई गई कीटनाशक का पानी पीने से बेहोश होकर मर गए थे। अब सोमवार को सुबह ग्रामीणों ने रझेड़ा सलेमपुर गांव के निकट मुख्य सड़क पर एक काले हिरन को मृत अवस्था में देखा। लोगों ने पुलिस तथा वन विभाग को सूचित किया। इसके बाद वन विभाग की टीम पहुंची। डीएफओ डीके चतुर्वेदी ने बताया कि हिरन का पोस्टमार्टम कराया गया है। हिरन का पैर टूटा था। सींग भी टूटा हुआ था। ऐसा लगता है कि हिरन भागते समय किसी वाहन की चपेट में आ गया। उसकी मौत हो गई। पशु चिकित्साधिकारी, पवांसा डा. नीरज कुमार गौतम ने बताया कि हिरन की मौत हादसे में हुई है। उसका सींग और टूट गया था और चोट लगने से अधिक रक्तस्राव हो गया था। इसमें ही हिरन की जान गई है।
हिरन के संरक्षण के लिए कोई योजना लागू नहीं
संभल। डीएफओ डीके चतुर्वेदी ने बताया कि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में काले हिरन पाए जाते हैं लेकिन अभी इनके संरक्षण के लिए कोई सरकारी कार्यक्रम लागू नहीं हैं। हिरन खेतों और जंगलों में स्वाभाविक तौर पर विचरण करते हैं। इसी दौरान खूंखार कुत्तों और हादसों का शिकार होते हैं। शासन को एक योजना हिरन के संरक्षण के लिए पिछले डीएफओ ने भेजी थी। अगर इन हिरनों के संरक्षण की किसी योजना पर अमल होता है तो वन्य जीवों की रक्षा आसानी से हो सकेगी।