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संभल जिले की चीनी मिलों ने दबाए किसानों के 66.73 करोड़ रुपये

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संभल। गन्ना क्रय अधिनियम के मुताबिक चीनी मिलों को गन्ना क्र्य करने के बाद 14 दिन की अवधि में भुगतान करना चाहिए। इसके लिए गन्ना क्रय अधिनियम में व्यवस्था दी गई है लेकिन चीनी मिलें इस व्यवस्था की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से भुगतान कर रही हैं और गन्ना विभाग के अधिकारी भी चुप हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतान पड़ रहा है। संभल जिले की तीन चीनी मिलों पर चालू वित्तीय वर्ष का 66.73 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य फंसा हुआ है। यह वह मूल्य जो चीनी मिलों ने 14 दिन की अवधि में नहीं दिया है। वैसे तो चीनी मिलों ने पर इस पेराई सत्र के गन्ना मूल्य का कुल 148.45 करोड़ रुपये बकाया है पर जिस भुगतान के लिए 14 दिन की अवधि बीत चुकी है वह सिर्फ 66.73 करोड़ रुपये ही है।
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इसके लिए जिला गन्ना अधिकारी कुलदीप सिंह चीनी मिलों के संपर्क में हैं लेकिन भुगतान नहीं करा पा रहे हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि भुगतान क्यों नहीं हो रहा है जबकि गन्ना क्रय अधिनियम में इसका प्रावधान हैतो उन्होंने कहा कि केवल संभल की यह स्थिति नहीं है। अन्य जनपदों में भी यही हालात हैं। उन्होंने बताया कि संभल जिले की भुगतान के मामले में स्थिति ठीक है। संभल जिले में बीते पेराई सत्र का शत प्रतिशत भुगतान हो गया है जबकि इस सत्र 84.79 प्रतिशत भुगतान हो चुका है। मंडल के जनपद अभी 70 प्रतिशत से नीचे हैं।
गन्ना मूल्य नहीं मिला तो पत्नी का इलाज कैसे कराएं
हाफिजपुर के किसान दलबीर सिंह ने बताया कि उनके द्वारा जो गन्ना बेचा था उसमें पौने दो लाख रुपये बिलारी चीनी मिल पर बकाया है। भुगतान न मिलने पत्नी का इलाज नहीं हो पा रहा है। जबकि सरकार ने खुद कहा है कि गन्ना बिक्री के 14 दिन में भुगतान मिल जाना चाहिए।
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