चंदौसी। थाना रजपुरा क्षेत्र में वर्ष 2018 में सामूहिक दुष्कर्म कर महिला को जिंदा फूंकने के मामले में महिला की ऑडियो रिकॉर्डिंग और गवाहों ने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा प्रस्तुत किए साक्ष्य से भी काफी मदद मिली। इस मामले में चार लोगों को अदालत ने दोषी करार दिया है।
गैंगरेप के बाद पीड़ित महिला ने अपने ममेरे भाई को कॉल की थी और पूरी घटना बताई थी। ये ऑडियो रिकॉर्डिंग मुकदमे में अहम साबित हुई। मृतका की चश्मदीद बेटी और ममेरे भाई की गवाही भी मुकदमे में अहम रही। दोनों ने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से अदालत को बताया था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अभियुक्तों के कपड़ों को पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा था। रिपोर्ट में सामने आया था कि अभियुक्तों के पकड़ों पर सीमेेन के ट्रेसेज मिले। इससे सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने पीड़िता का मोबाइल भी बरामद किया था।
ये साक्ष्य प्रस्तुत किए गए
अभियोजन पक्ष से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि न्यायालय में साक्ष्य के रूप में ऑडियो रिकॉर्डिंग, मृतका के जले कपड़े, घटनास्थल से मिले दो बिछुए, एक कुंडल, बाल के अवशेष, मृतका का मोबाइल और अभियुक्त गण के घटना के समय पहने कपड़े, पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पेश किया गया था।
वारदात में शामिल बाल अपचारी की पत्रावली अलग
घटना में शामिल बाल अपचारी की पत्रावली किशोर न्यायालय में चले जाने के बाद अलग हो गई थी। जो बाद में मुकदमे के विचारण के समय साक्ष्यों के होने के पश्चात आयी थी। इसमें कुछ साक्षियों की गवाही हो चुकी है, जो अभी विचाराधीन हैं।
तत्कालीन एसपी के खिलाफ हुई थी निलंबन की कार्रवाई
तत्कालीन एसपी संभल एसएम भारद्वाज समेत थाना के अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी। तत्कालीन एसपी ने घटना में पीड़ित के साथ दुष्कर्म होने से इन्कार किया था। जबकि विधि विज्ञान प्रयोगशाला में अभियुक्तों के कपड़ों पर सीमेन मिला था। तत्कालीन सरकार ने एसपी और थाना के कई पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया था।
मृतका का भाई बोला- फांसी की सजा मिले
मृतका के ममेरे भाई ने बताया कि न्यायालय से न्याय मिला है। पूर्ण न्याय तब मिलेगा, जब न्यायालय सभी को फांसी की सजा सुनाएगा। ताकि समाज में ऐसी घटना करने से पहले मुल्जिम हजार बार सोचे।