जिले में एएसआई संरक्षित छह स्मारक हैं। संभल की जामा मस्जिद, फिरोजपुर किला, सौंधन किला, चंद्रेश्वर तीर्थ, बेरनी मंदिर और गुमथल स्मारक इसमें शामिल हैं। सभी स्मारकों के आसपास अतिक्रमण की स्थिति है।
इसी क्रम में सौंधन किले का निरीक्षण किया गया है। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि सौंधन का किला मुगल बादशाह शाहजहां के दौर का बना हुआ है। 1645 ईसवीं में इसका निर्माण किए जाने की जानकारी सामने आई है। चार जनवरी को निरीक्षण करने के लिए पहुंचे तो अतिक्रमण पाया गया था।
इसकी जानकारी पत्राचार के माध्यम से एएसआई को दी गई थी। इसी क्रम में टीम ने पैमाइश की है, जो अतिक्रमण किया हुआ है उसको एएसआई द्वारा हटवाया जाएगा। पुलिस प्रशासन का जो सहयोग चाहिए होगा वह दिया जाएगा। डीएम ने बताया कि अन्य स्मारकों का भी टीम निरीक्षण करेगी। जहां भी अतिक्रमण मिलेगा उसको हटाया जाना है।
एएसआई के नक्शे में किले का आकार बड़ा, मौके पर मामूली मिला। एएसआई की टीम एक नक्शा अपने साथ लाई थी। जिसमें किला बड़े आकार में दर्ज है। इसके आसपास भी कोई निर्माण नहीं है। इस नक्शे के हिसाब से तो अतिक्रमण के साथ ही अवैध कब्जे भी किए जाने की आशंका है। हालांकि, कानूनगो और लेखपाल से एएसआई की टीम ने पुराना नक्शा निकालने के लिए कहा है। जिसके मुताबिक कार्रवाई की जानी है। जो नक्शा लेखपाल द्वारा दिखाया गया है उससे भी मिलान नहीं हो रहा है।
मुगलकाल में गवर्नर रूस्तम खान दक्खनी ने कराया था सौंधन किले का निर्माण
बतातें हैं कि मुगल बादशाह शाहजहां की सल्तनत में संभल व मुरादाबाद के गवर्नर रहे रूस्तम खान दक्खनी ने संभल जिले के सौंधन में इस किले का निर्माण कराया था। यह किला स्थापत्य कला की खूबसूरती और तत्कालीन दौर की यादगार निशानियों में से एक है। किले का निर्माण 1645 ईसवीं में होने का उल्लेख एएसआई के रिकार्ड में दर्ज है। किले के पास ही एक मस्जिद भी बनवाई थी। देखरेख के अभाव में किले की हालत तो जर्जर हो गई है। वहीं दूसरी ओर अतिक्रमण और अवैध कब्जे इस स्मारक को नष्ट कर रहे हैं।
एएसपी भी पहुंचे
सौंधन के किले की पैमाइश की सूचना पर एएसपी श्रीश्चंद्र भी पहुंचे। उन्होंने भी किले के आसपास निरीक्षण किया। हालांकि टीम ने पैमाइश के बाद ग्रामीणों से अतिक्रमण हटाने के लिए कहा है। टीम के एक सदस्य ने बताया कि जो अतिक्रमण या अवैध कब्जे हैं उनको हटवाने की कार्रवाई की जाएगी। जिले के सभी छह स्मारकों की पैमाइश की जानी है।