संभल।
जामा मस्जिद का बोर्ड एएसआई ने अब जुमा मस्जिद के नाम से बनवाया है। यह बोर्ड जल्द ही लगाया जाएगा। अभी तक संरक्षित इमारत होने का बोर्ड मस्जिद परिसर के अंदर लगा था। जबकि मस्जिद कमेटी और एएसआई के बीच जो 1927 में एग्रीमेंट किया गया था उसमें जामा मस्जिद दर्ज है। जामा मस्जिद कमेटी के उप सचिव मशहूद अली फारूखी का कहना है कि जब एग्रीमेंट में जामा मस्जिद लिखा है तो जुमा मस्जिद का बोर्ड एएसआई को नहीं लगाना चाहिए। इस बारे में एएसआई से बात की जाएगी। कि नाम जुमा मस्जिद के नाम से क्यों बनवाया गया है।
जामा मस्जिद 1920 से एएसआई संरक्षित इमारत है। 1927 में एएसआई और जामा मस्जिद कमेटी के बीच एग्रीमेंट हुआ था। 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान बवाल हो गया था। उसके बाद से लगातार मस्जिद देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब एएसआई को मस्जिद परिसर के बाहर बोर्ड लगाना है जो तैयार करा लिया गया है। इस बोर्ड पर जुमा मस्जिद लिखा है।
जामा मस्जिद कमेटी के उप सचिव का कहना है कि जामा मस्जिद ही लिखा जाना चाहिए। वहीं, दूसरी ओर एएसआई के अधिवक्ता विष्णु कुमार शर्मा ने बताया कि एएसआई संरक्षित इमारत होने का बोर्ड लगाया जाता है। पहले से भी यह बोर्ड लगा था। अब एएसआई की टीम को जब सुविधा होगी तब यह बोर्ड मस्जिद के बाहर लगाया जाएगा।
सर्वे के लिए दायर याचिका में जामी मस्जिद का उल्लेख किया गया था
हिंदू पक्ष की ओर से 19 नवंबर को चंदौसी स्थित न्यायालय में सर्वे के लिए जो याचिका दायर की गई थी। उसमें जामी मस्जिद का उल्लेख किया गया था। जामा मस्जिद कमेटी के उप सचिव का कहना है कि जामा मस्जिद उर्दू का शब्द है। जबकि जामी मस्जिद अरबी भाषा का शब्द है। दोनों का मतलब एक ही होता है। लेकिन जुमा मस्जिद नया शब्द एएसआई ने बोर्ड पर लिखवाया है।