संभल। असमोली क्षेत्र के गांव रायाबुजुर्ग में सरकारी तालाब की जमीन पर बनी मस्जिद और मदरसे के अक्तूबर-2025 में ध्वस्तीकरण के बाद मंगलवार को प्रशासनिक टीम ने पास बने तीन मकानों को भी ध्वस्त करा दिया। तहसील की रिपोर्ट के मुताबिक तीन सगे भाइयों के इन मकानों का निर्माण भी तालाब की जमीन पर था। तीनों पर 1.04-1.04 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
जुर्माने की कार्रवाई पूर्व में हटाई जा चुकी मस्जिद के मुतवल्ली मिंजार पर भी की गई है। मुतवल्ली पर पांच लाख रुपये और मदरसे की देखभाल करने वाले वारिस पर 6.04 लाख जुर्माना लगा है।
तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कार्रवाई की जद में असरार, अबरार और बाबू के मकान आए हैं। ये मकान 800 वर्गमीटर में बने थे। गांव में करीब 10 साल पहले बनी मस्जिद और मदरसे की जमीन सरकारी तालाब की होने के मामले की तहसीलदार न्यायालय में सुनवाई हुई थी। तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला मिलने पर अक्तूबर-2025 में मस्जिद व मदरसे को हटवाया गया था। पास में बने मकानों को हटाने के निर्देश दिए थे।
दूसरे पक्ष की ओर से एडीएम कोर्ट में अपील से मकानों पर कार्रवाई रुक गई थी। नवंबर-2025 में एडीएम कोर्ट से अपील खारिज होने पर तीन मकानों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे।
तहसीलदार के मुताबिक मकान पर काबिज लोग तीन दिन से अपने मकान तोड़ रहे थे। मंगलवार को गांव पहुंची टीम ने जेसीबी की मदद से सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त करा दिया। एक मकान का कुछ हिस्सा ध्वस्त होना बाकी है। उसमें रहने वालों को जल्द दूसरी व्यवस्था कर ध्वस्तीकरण का निर्देश दिया है।
दूसरी ओर मुततवल्ली मिंजार का कहना है कि गांव में शुरुआत से यह जमीन की बताई जाती थी, इसीलिए 10-12 साल पहले मस्जिद का निर्माण कराया गया था। अबरार का कहना है कि अपनी पुश्तैनी मानकर हम तीन भाइयों ने मकान बनाए थे।
इससे पूर्व रविवार को संभल के गांव सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद और मदरसे को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया था। खाली हुई जमीन हाथोंहाथ 20 जरूरतमंद लोगों को पट्टे पर आवंटित कर दी गई थी।
शादी हॉल का संचालन भी होता था
तहसील की टीम ने बताया कि गांव राया बुजुर्ग में करीब 10 वर्ष पहले ढाई बीघा जमीन में मस्जिद और मदरसे का निर्माण किया गया था। मदरसे से शादी हॉल का संचालन भी किया जाता था। पास में तीनों मकान 800 वर्गमीटर जमीन पर बने थे।