चंदौसी। यूक्रेन में फंसे चंदौसी के दो छात्र हंगरी के रास्ते रविवार की शाम घर पहुंच गए हैं। दोनों ने बताया कि यूक्रेन से हंगरी बॉर्डर पर पांच घंटे इंतजार करना पड़ा था। जेब में फ्लाइट के पैसे नहीं थे। यही चिंता थी कि घर कैसे पहुंचेंगे। सरकार ने मदद की, दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनी सरजमीं पर कदम रखा, तो लगा अब जीवन सुरक्षित है।
चंदौसी के आवास विकास कालोनी निवासी अनिल गुप्ता के बेटे वैभव गुप्ता और सरस्वती विहार कालोनी निवासी शशांक वार्ष्णेय ने इसी माह यूक्रेन की उजहोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था। यह कीव से करीब 900 किलोमीटर दूर हैं। यहां आर्मी का बेस कैंप भी है। 24 फरवरी को इस शहर पर हमला नहीं हुआ था। पर लडाकू विमान और अन्य वाहनों की आवाहाजी खूब थी। वैभव गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय में उसके साथ 250 भारतीय छात्र थे। बाहर जाने की अनुमति नहीं थी, केवल ड्राई फ्रूट और बिस्कुट पर आश्रित थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बस से घर वापसी के लिए शुक्रवार को ऑनलाइन फार्म भरवाया। सभी छात्र पांच बसों में शनिवार की सुबह करीब नौ बजे हंगरी बॉर्डर के लिए रवाना हुए। बार्डर करीब 35 किलोमीटर था। एक घंटे में पहुंच गए। पर वहां भारतीय एंबेसी पहले से तैयार थी। पासपोर्ट पर मोहर लगाने में समय लग गया और पांच घंटे इंतजार करना पड़ा। हंगरी में प्रवेश पर कुछ चिंता दूर हुई। भारतीय एंबेसी ने मेहमान की तरह स्वागत किया और भोजन कराकर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट भिजवाया। बुडापेस्ट से सभी 250 छात्र शनिवार की रात करीब नौ बजे फ्लाइट में सवार हो गए। रविवार की सुबह नौ बजे फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी। अपनी सरजमी पर कदम रखकर लगा कि अब जीवन सुरक्षित हैं। देर शाम दोनों युवक दिल्ली से चंदौसी पहुंच गए।
जेब में नहीं थे फ्लाइट के पैसे, पीएम का शुक्रिया, घर सुरक्षित पहुंचाने के लिए
चंदौसी। यूक्रेन से घर पहुंचे छात्र शशांक वार्ष्णेय ने बताया कि एटीएम सभी बंद थे। जेब में कम रुपये बचे थे। हंगरी बॉर्डर तक पहुंचने के लिए प्रत्येक छात्र को 50-50 डालर खर्च करने पड़े थे। फ्लाइट के पैसे नहीं थे। ऐसे में चिंता हो रही थी कि हंगरी में प्रवेश करने के बाद घर कैसे पहुंचेंगे। पर देश के प्रधानमंत्री का शुक्रिया कि उन्होंने नि:शुल्क फ्लाइट की व्यवस्था कराई। एंबेसी ने पूरा ख्याल रखा। एयर इंडिया ने भी मेहमानों की तरह देखभाल की।
शाम छह बजे चार घंटे के लिए मिली कर्फ्यू में छूट
चंदौसी/बबराला। यूक्रेन के शहर डिनोप्रोपेट्रोस्क में गुन्नौर के मोहल्ला फैजल निवासी छात्र सलमान अली भी फंसा हुआ है। सलमान ने परिजनों को फोन पर बताया कि खाने का राशन समाप्त हो गया था। शनिवार की शाम बाहर जाने की छूट मिली, तो एक सप्ताह के लिए बिस्कुट, नमकीन, ड्राई फ्रूट आदि सामान खरीद ले गए।
सलमान ने यूक्रेन से फोन पर अपने पिता नौशे अली को बताया कि उसकी और उसके साथियों की एक दिन पहले बस चालक से बात हुई थी। एंबेसी से बातचीत के बाद पोलैंड के बॉर्डर पर जाना था। पर शनिवार को आखिर समय में मालिक ने बस भेजने से इनकार कर दिया। कहा कि हमले में बस क्षतिग्रस्त हो गई, तो भरपाई कौन करेगा। साथ ही भारतीय एंबेसी ने भी विश्वविद्यालय को सूचना दी है कि जब तक एंबेसी संपर्क न करें, कोई भी छात्र अपना स्थान न छोड़े। सलमान अली ने पिता नौशे को बताया कि हम हॉस्टल में हैं।
शनिवार की शाम यूक्रेन पुलिस की ओर से शाम छह बजे से चार घंटे के लिए कर्फ्यू में ढील दी गई। साथ ही सामान के लिए बाजार भी खुलवाया। इस दौरान एक सप्ताह के लिए बाजार से वह बिस्कुट, नमकीन, ड्राइफ्रूट आदि सामग्री खरीद लाया है। धमाकों की आवाज से रात जाग कर काटनी पड़ रही है। दिन कुछ समय के लिए सोते हैं।