चंदौसी (संभल)। संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए अदालत में पेश किए गए दावा को लेकर न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई की तिथि नीयत की है। जिसको लेकर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जहां एक ओर हरिहर मंदिर के वादकारियों व अधिवक्ताओं को सुरक्षा प्रदान करना पुलिस का दायित्व है, वहीं दूसरी ओर हड़ताल से न्यायालय की ओर से पहले से लगी मुकदमों की तारीखों में आने वाले वादकारियों को न्यायालय परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित होने से परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कड़ी सुरक्षा में दूर-दराज से आने वाले वादकारियों के न्यायालय में प्रवेश पर प्रतिबंध से न्यायालय का कार्य भी प्रभावित होगा। हालांकि बार एसोसिएशन चंदौसी द्वारा कलम बंद हड़ताल होने से प्रशासन भी सुरक्षा को लेकर राहत महसूस कर रहा है। वहीं कुछ अधिवक्ता हड़ताल के इस निर्णय से संतुष्ट नजर नहीं आए। जिससे कुछ अधिवक्ता हड़ताल के पक्ष में दिखे तो कुछ अधिवक्ताओं ने सवाल भी खड़े किए।
संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा देश का संवेदनशील मामला है। दावे की नीयत तिथि पर सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध में लोगों को सहयोग करना चाहिए। वादकारियों का न्यायालय में प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रशासन का निर्णय सही है। जिससे अमन चैन कायम रहेगा।
- नवनीत सिंह यादव, पूर्व सचिव बार एसोसिएशन चंदौसी
पहली तिथि है, जिससे सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन का यह प्रयास सही है। आगे पड़ने वाली तारीखों पर इतनी सख्ती न बरती जाए। आगे की तारीखों पर न्यायिक कार्य सुचारु रहना चाहिए। न्यायालय का कार्य नहीं रुकना चाहिए। अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
-विनोद कुमार सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता
न्यायालय के लिए सभी वादकारी समान होते हैं। किसी विशेष के लिए सुरक्षा की दृष्टि से इतना बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए। ज्यादा प्रतिबंध से वादकारियों और अधिवक्ताओं को परेशानी होगी। प्रतिबंध से कई मुकदमों में वादकारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
-दीपक गुप्ता, अधिवक्ता
यह मामला दीवानी का है। शहर के लिए संवेदनशील है। इससे समयावधि के मुकदमों के वादकारी परेशान होंगे। इस मामले में प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में अधिवक्ताओं का पूर्ण सहयोग है, लेकिन सुरक्षा उस तरह रखी जानी चाहिए कि किसी वादकारी व अधिवक्ता को परेशानी न हो सके।
-सगीर सैफी, पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन चंदौसी