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संभल में फिर चला बुलडोजर: सरकारी जमीन पर तैयार किए थे मकान, प्रशासन की पहुंची टीम, लोग भी खुद तोड़ने लगे

Mon, 12 Jan 2026 02:33 PM IST
विमल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, संभल

सार

संभल के सिरसी में सरकारी भूमि पर बने अवैध मकानों को खाली कराने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। नोटिस के बाद नायब तहसीलदार की टीम ने भवन तोड़ने की कार्रवाई की। इसके अलावा कुछ लोगों ने खुद ही अपने मकान गिरा दिए। 
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संभल में प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण - फोटो : संवाद
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विस्तार
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संभल जिले के सिरसी कस्बे के मोहल्ला शर्की में सरकारी जमीन पर बने अवैध मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सोमवार को प्रशासन जेसीबी की मदद से मकानों को गिरवा रहा है। यह मकान करीब दस वर्ष पहले ग्राम समाज और खाद के गड्ढों की आरक्षित भूमि पर बनाए गए थे। लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बाद मामला तहसीलदार न्यायालय में पहुंचा।

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संभल में प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण - फोटो : संवाद
जहां सुनवाई के दौरान तथ्यों के आधार पर मकान खाली करने के आदेश दिए गए। न्यायालय के आदेश के बावजूद मकान स्वामियों ने समय पर मकान खाली नहीं किए। इसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मकान ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए। इसी क्रम में रविवार से कार्रवाई शुरू हुई जिसमें नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही।

संभल में प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण - फोटो : संवाद
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को भी एहतियातन तैनात किया गया है। प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद इलाके में खलबली मच गई थी। शनिवार को नायब तहसीलदार बबलू कुमार राजस्व विभाग की टीम के साथ सिरसी पहुंचे थे और ग्राम समाज व खाद के गड्ढों की भूमि पर बने आठ मकानों को खाली करने के लिए नोटिस थमाए गए थे।

नोटिस में मकान खाली करने के लिए सोमवार तक का समय दिया गया था। हालांकि, कार्रवाई की आशंका के चलते कई लोगों ने रविवार को ही खुद अपने मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह सभी मकान आरक्षित सरकारी भूमि पर बनाए गए थे और न्यायालय से इन्हें खाली कराने का आदेश पहले ही हो चुका है।
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आदेश के अनुपालन में प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। रविवार को अयूब हसन, जुल्फिकार हुसैन, असकरी, कामिल और मोहम्मद समेत कई लोगों के मकानों को तोड़ा जाने लगा। कार्रवाई के दौरान मकान स्वामियों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। वर्षों की मेहनत से बनाए गए मकान टूटते देख परिवारों में गम और आक्रोश दोनों देखने को मिला।


वहीं प्रशासन का कहना है कि सरकारी और आरक्षित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना उनकी जिम्मेदारी है। कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश के तहत की जा रही है।
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