चंदौसी। भाकियू (अअ) की महापंचायत में आश्वासन के बाद गुरुवार को एसडीएम कार्यालय पर आयोजित की गई पुलिस प्रशासन, किसान और मिल अधिकारियों की त्रिपक्षीय वार्ता में मिल समर्थक भी आ गए। तीखी नोकझोंक के बाद बकाया गन्ना भुगतान का शेड्यूल तय किया जाने लगा लेकिन मिल समर्थकों के हस्तक्षेप के बाद भाकियू नेता भड़क गए। एसडीएम, सीओ की मौजूदगी में दोनों पक्षों में जमकर हंगामा हुआ। नोकझोंक, खींचतान, गाली गलौज तक होने लगी तो भाकियू नेताओं ने वार्ता बैठक का बहिष्कार कर 27 फरवरी को बड़े आंदोलन और आरपार की लड़ाई का एलान कर दिया।
18 फरवरी को भाकियू (अअ) की महापंचायत और आंदोलन के दौरान प्रशासन ने 21 फरवरी को पुलिस प्रशासन की मध्यस्थता में भाकियू (अअ) नेताओं और मिल अधिकारियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता बुलाई थी। भाकियू (अअ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह, आशिक रजा, राजपाल यादव, वनवारी यादव, रिषभ चौधरी, अर्जुन सिंह, ठाकुरदास, जयवीर सिंह व बाबू राम प्रजापति पहुंचे। वीनस शुगर मिल के मुख्य महाप्रबंधक आरके सिंह, अध्याशी धर्मेंद्र चौधरी व डिप्टी जीएम (केन) शाहिद हुसैन पहुंचे। इसी दौरान मिल के समर्थन में राज बहादुर सिंह, चौधरी युवराज सिंह आदि कई लोग पहुंच गए।
शुरुआती दौर में ही तीखी नोकझोंक हुई लेकिन एसडीएम महेश प्रसाद दीक्षित व सीओ डा.के सरोज के समझाने पर वार्ता शुरू हुई। जिसमें चीनी मिल ने 2018-19 की बकाया गन्ना भुगतान की कार्य योजना रखी गई। मिल ने कहा कि 14 दिन पहले मिल पर 5494.23 लाख का बकाया था, जिसमें 985.32 लाख का भुगतान किया गया। 4508.91 लाख अवशेष है। 1314 लाख की चीनी उपलब्ध है, जिसकी बिक्री करके पांच-पांच दिन बाद तीन-तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
जिससे करीब पांच जनवरी तक का भुगतान हो जाएगा। शासन से 28 फरवरी तक 2594.17 लाख रुपये का साफ्ट ऋण मिलने की आशा है। जिसके मिलते ही पूर्ण भुगतान हो जाएगा। नगद गन्ना खरीद नहीं करने का भी भरोसा दिया गया। चौधरी हरपाल सिंह का कहना था कि यदि साफ्ट ऋण नहीं मिलता है तो पांच जनवरी के बाद का भुगतान कैसे होगा। लगभग सहमति बन चुकी थी, लिखित शेड्यूल देना था लेकिन इसी दौरान एक मिल समर्थक भड़ककर बोल पड़े।
चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि मिल समर्थकों को इसमें बुलाया नहीं गया था, तो यह कैसे बोल रहे हैं। इस पर हंगामा हो गया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। नोकझोेंक के बाद हाथापाई की नौबत आ गई। आखिरकार, भाकियू नेता बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गए। बाद में मुरादाबाद में मंडलायुक्त कार्यालय पर प्रस्तावित धरने को रद्द करते हुए 27 फरवरी को चंदौसी में ही वीनस शुगर मिल के खिलाफ बड़ा आंदोलन कर आरपार के संघर्ष का एलान कर दिया गया। सभी पक्ष चले गए। वार्ता बैठक बेनतीजा निकली।