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रक्त की जांच के लिए सीढ़ियों के रास्ते तीन मंजिल पर पहुंचा दिव्यांग

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संभल। जिला अस्पताल लापरवाही की मिशाल बनता जा रहा है। आए दिन लापरवाही के मामले प्रकाश में आते रहते हैं। लेकिन इस बार मानवता को शर्मसार करने वाली लापरवाही सामने आई है। जिसने स्वास्थ्य विभाग की दुरूस्त व्यवस्थाओं का दावा करने वालों की पोल खोल दी है। दिव्यांग रक्त परीक्षण के लिए तीन मंजिल पर सीढ़ियों के सहारे भटकता रहा, लेकिन कोई मदद नहीं मिली और थक हार कर दिव्यांग घर लौट गया।
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बुधवार को तहसील के गांव ईसापुर-मुसापुर निवासी दिव्यांग अशरफ रक्त परीक्षण कराने के लिए आए थे। वह पर्चा बनवाने के लिए भूतल पर पहुंचे, जहां पर्ची बना कर हाथ में दी। साथ ही बताया कि वह तीसरी मंजिल के 51 संख्या कक्ष में चले जाए। दिव्यांग के लिए तीसरी मंजिल पर जाना आसान नहीं था। वह लिफ्ट पर पहुंचे जहां लिफ्ट बंद पड़ी मिली। व्हीलचेयर भी गायब थी। मजबूरन वह सीढ़ियों से ही तीसरी मंजिल की ओर चल पड़े।
पहली मंजिल पर पहुंचते ही वह हताश हो गए। लेकिन दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए रक्त परीक्षण प्रमाण पत्र चाहिए था। इसलिए वह चलते गए और किसी तरह तीसरी मंजिल पर पहुंचे। कक्ष संख्या 51 जाकर देखा तो वहां खाली कुर्सी पड़ी थी। दिव्यांग ने बताया कि रक्त परीक्षण करने वाली टीम हड़ताल में शामिल होने गई है। इसलिए जांच नहीं हो सकती। किसी तरह तीन मंजिल तक पहुुंचने वाले दिव्यांग की सारी मेहनत पर पानी फिर गई।
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वह निराश होकर वहीं बैठ गए। सर्दी के मौसम में माथे पर आया पसीना दिव्यांग की बेबसी बयां कर रहा था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई सुधि लेने वाला नहीं था। जब दिव्यांग से सीढ़ियों से आने का कारण पूछा तो वह स्वास्थ्य विभाग की बदहाली पर रोना रोते नजर आए। बताया कि लिफ्ट का इस्तेमाल दिव्यांगों के लिए होता है। लेकिन लिफ्ट बंद है। चालू करने के लिए कहा तो किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। मजबूरन तीन मंजिलों तक सीढ़ियों के सहारे ही जाना पड़ा।
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