100 million dues of farmers on sugar mills in sambhal
पेराई सत्र शुरू होने के 25 दिन बाद भी सरकार ने नहीं घोषित किया गन्ना मूल्य
भुगतान जारी करने के लिए गन्ना मूल्य घोषित होने का इंतजार कर रहीं हैं चीनी मिलें
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। गन्ना खरीदने के बाद 14 दिन की अवधि में गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों के बैंक खाते में पहुंच जाना चाहिए। गन्ना क्रय अधिनियम में इसका प्रावधान है लेकिन जिस सरकार को इस अधिनियम का पालन कराना है, उसी सरकार ने अभी तक चालू पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया है। गन्ने का भाव तय होने में हो रही देरी का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। अकेले संभल जिले की चीनी मिलों में किसानों के करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक फंस गए हैं। भुगतान कब तक मिलेंगे। इस बात को न तो गन्ना विभाग ने स्पष्ट किया है और न ही चीनी मिलों ने। बस इतना जरूर कहा जा रहा है कि जैसे ही राज्य सरकार गन्ना मूल्य घोषित करेगी वैसे ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चीनी मिलों की ओर से कहा जा रहा है कि अगर अभी भुगतान करेंगे तो बाद में अंतर गन्ना मूल्य बनेगा और उसके भुगतान के लिए एरियर जारी करना पड़ेगा। असमोली चीनी मिल ने अभी तक 18 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है। जबकि रजपुरा स्थित चीनी मिल ने 16 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है। दोनों चीनी मिल अब तक 34 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुके हैं। यदि इस गन्ने का मूल्य 300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से लगा दिया जाए तो भी 102 करोड़ रुपये हो जाएंगे। वैसे गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विंटल है और अधिकतर किसानों के पास अगेती प्रजाति का ही गन्ना है। किसान चाहते हैं कि उन्हें 14 दिन की अवधि में गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाए पर ऐसा नहीं हो पा रहा है। वीसन शुगर मिल के पास तो अभी पिछले सत्र का भी भुगतान फंसा हुआ है। इस सत्र में भी पांच लाख क्विंटल गन्ना वीनस शुगर मिलको किसान दे चुके हैं। पर एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। इसका मूल्य भी 15 करोड़ बनता है। किसानों ने सरकार से गन्ना मूल्य के भुगतान में शीघ्रता का आग्रह किया है।
दो नवंबर तक चल गईं थीं तीनों चीनी मिलें
संभल। जिले की तीनों चीनी मिलें 2 नवंबर तक चल गईं थीं। इस हिसाब से चीनी मिलों को अब तक 14 दिन में खरीदे गए गन्ने का मूल्य दे देना चाहिए था पर अभी तक किसी भी चीनी मिल ने भुगतान शुरू नहीं किया है। देरी के लिए कौन जिम्मेदार है। यह सवाल किसानों के बीच उठाया जा रहा है। लेकिन अभी सटीक जवाब देने के लिए कोई तैयार नहीं है। जबकि 40 लाख क्विंटल गन्ना तीन चीनी मिल ले चुके हैं। जिला गन्ना अधिकारी कुलदीप सिंह का कहना है कि जल्दी ही सरकार गन्ना मूल्य तय करेगी। इसके बाद का भुगतान शुरू हो जाएंगे