‘धर्मांतरण कानून से शादी की आड़ में झांसे से बचेंगी युवतियां’
सहारनपुर। धर्मांतरण कानून पर कुछ धर्माचार्यों का मानना है कि इस कानून से मूल पहचान छिपाकर धर्म परिवर्तन किए जाने के धोखे से युवतियां बच सकेंगी। साथ ही आरोपी को कानून का खौफ भी रहेगा। हालांकि उनका यह भी कहना है कि कानून के साथ अपने स्तर पर जागरूक रहने से ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है। वहीं, कुछ धर्माचार्य सरकार के इस प्रयास को सियासी मान रहे हैं। जबकि हिंदू संगठन के पदाधिकारी कानून का समर्थन कर रहे हैं।
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जिले में इस तरह धोखे की शिकार हुई युवतियां
- केस एक : सितंबर माह में देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव की युवती का दूसरे मजहब के युवक के साथ प्रेम प्रसंग हो गया था। काफी दिन बाद उसे पता चला कि इस प्यार के पीछे की मंशा धर्म परिवर्तन कराकर उत्पीड़न करना है। इसके बाद परिजनों और हिंदू संगठनों की मदद से युवती को समझाया गया। पुलिस ने आरोपी युवक को गिफ्तार कर लिया।
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- केस दो : सितंबर के महीने में ही एक महिला के साथ धर्म परिवर्तन की मंशा से प्यार का झांसा देने का मामला सामने आया था। महिला रुड़की की रहने वाली है। पति की मौत के बाद उसके ही दोस्त के साथ वह घुलमिल गई तो वह उसे शहर के पास गांव में ले आया। यहां उसे पता चला कि दोस्त गलत नीयत और मंशा से उसे गुमराह कर रहा है। आरोपी दूसरे मजहब से है। इस मामले में आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है।
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- केस तीन : जुलाई माह में थाना जनकपुरी क्षेत्र में एक युवती का दूसरे मजहब के युवक से परिचय शुरू हुआ। बाद में युवती को पता चला कि इससे पहले भी वह अन्य युवतियों को गुमराह कर चुका है। परिजनों तक मामला पहुंचा तो आरोपी को बाद में गिरफ्तार किया गया।
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धर्म की आड़ में धोखा देने की घटनाएं होंगी कम : जोशी
- बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी जी महाराज का कहना है कि इस कानून से प्यार या संबंधों के नाम पर धोखा देने और धर्म परिवर्तन कराकर गलत मंशा से उत्पीड़न करने के मामलों में कमी आएगी। हालांकि, कोई किसी भी मजहब का हो, उसे इतना जागरूक तो होना ही चाहिए कि किसी गलत मंशा से उसे गुमराह तो नहीं किया जा रहा है।
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कानून से मिलेगी मदद, फिर भी जागरूक रहें युवतियां : ठाकुर सूर्यकांत
-हिंदू जागरण मंच के प्रांत संपर्क प्रमुख ठाकुर सूर्यकांत का कहना है कि प्यार का झांसा देकर धोखा देने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने की मंशा रखने वालों पर अंकुश लगाने में कानून से काफी मदद मिलेगी। जिले में ही 10 से अधिक युवतियों को इस तरह के धोखे का शिकार होने से बचाया गया है। संगठन यह काम आगे भी करता रहेगा।
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सिर्फ सियासी खेल है, बाकी कुछ नहीं : नायब शहर काजी
- नायब शहर काजी नदीम अख्तर कहते हैं कि पहली बात तो यह है कि कोई किसी भी मजहब का हो, उसे जबरन दूसरे मजहब में शामिल नहीं किया जा सकता है। यह तो आस्था का मसला है। इसलिए उनकी नजर में यह कानून सिर्फ सियासी खेल है, बाकी कुछ नहीं है।
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