सहारनपुर के सरसावा में पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बरसात का असर मैदान इलाकों में भी दिखना शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को यमुना नदी में जबरदस्त उफान आया और खतरे से ऊपर बह रही यमुना का पानी दर्जनों गांवों में घुस गया है।
यमुना के तटवर्ती गांवों के संपर्क मार्ग पूूरी तरह से कट गए हैं और गांव टापू में तब्दील हो गया है। प्रशासन ने जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई और तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। यमुना किनारे के गांवों पर नजर रखने के निर्देश भी दिए हैं।
बृहस्पतिवार को यमुना नदी का प्रवाह पूरे उफान पर रहा। हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी के कारण यमुना नदी के सभी नौ पाट पूरे भरकर चल रहे थे।
जिसका परिणाम ये हुआ की यमुना नदी का पानी तटवर्ती गांवों के खेतों में चला गया। कई जगह तो पानी गांव के भीतर भी घुस गया। ग्राम चोरी मंडी, घोड़ों, पीपली गांव जाने वाली पूरी सड़क बाढ़ में बह गई।
जिससे घोड़ों, पीपली, सहित कई गांवों का संपर्क पूरी तरह से कट गया। गांव में जाने वाले सभी मार्गों पर या तो पानी जमा है या वे मार्ग बह चुके हैं। वहीं ग्राम चोरी मंडी में भी यमुना का पानी खेतों से होता हुआ गांव में दाखिल हो गया।
हालांकि कुछ देर बाद पानी का बहाव कम हुआ और सारा पानी खेतों में चला गया। बावजूद इसके ग्राम बैंगनी, दुमझेड़ा, दुमझेड़ी, चोरी मंडी, चौरा कलां, हैदरपुर, शाहजहांपुर, झरौली, हुसैनपुर, घंघोड़, कुतुबपुर आदि के खेत जलमग्न हो गए हैं।
जानकारों ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी 24 घंटे में सरसावा क्षेत्र में पहुंचता है तो ऐसे में संभावना है कि रात में पानी और बढ़ेगा। वहीं यमुना नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर से ग्रामीण दहशत में हैं।
क्योंकि इस समय धान की फसल खेतों में लगी हुई है। जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इस संबंध में एसडीएम नकुड़ ने कहा कि उन्होंने लेखपालों को सचेत कर दिया है। तटवर्ती गांवों पर हमारी नजर है।
वर्ष 2013 में पहाड़ों पर हुई बारिश के चलते शहर में ढमोला में उफान आया था और यहां बाढ़ आ गई थी। इसके बाद ढमोला में 150 से अवैध कब्जों को इस बाढ़ का जिम्मेदार माना गया था।
उस वक्त प्रशासन ने एफआईआर तक कराया था। मगर, अवैध कब्जे नहीं हटाए गए। पहाड़ों पर हुई बारिश के चलते ढमोला में भी पानी आने लगा है। ऐसे में इसके आसपास बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।