सहारनपुर के बड़गांव के गांव बेहड़ा के पूर्व माध्यमिक स्कूल में पिछले दो माह से कोई अध्यापक तैनात न होने के कारण बच्चे बिन पढ़े ही स्कूल आ जा रहे हैं। चपरासी स्कूल खोलता और समय पर बंद कर देता है।
बच्चों का भविष्य दांव पर लगता देख अभिभावकों ने कई बार बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से अध्यापक की तैनाती की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब पूर्व विधायक ने लखनऊ में बेसिक शिक्षा सचिव से भेंट कर विद्यालय में तैनाती की मांग की है।
बेहड़ा गांव के जूनियर स्कूल में इसी साल मार्च माह में प्रधानाध्यापक सेवानिवृत्त हो गए थे। उसके बाद यहां एक सहायक अध्यापक को भेजा गया था, लेकिन दो माह पूर्व विभाग ने उनका स्थानांतरण अन्य जगह कर दिया।
इसके बाद से यहां तैनात एक मात्र चपरासी अजमेर सिंह स्कूल को खोलता है और बंद कर देता है। बच्चें स्कूल तो रोज आते हैं, लेकिन खेलकूद पर लौट जाते हैं। विद्यालय में वर्तमान में 55 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
ग्राम प्रधान पति संजू उर्फ जगमाल सिंह का कहना है कि वे कई बार एबीएसए से लेकर बीएसए तक से स्कूल में शिक्षक तैनाती कराने की मांग कर चुके हैं। बुधवार को पूर्व विधायक शशिबाला खुद स्कूल भी पहुंची और उन्होंने फिर बेसिक शिक्षा अधिकारी से इस बारे में बात की।
इस बारे में बीएसए बुद्धप्रिय सिंह का कहना था कि मामला संज्ञान में आया है। एक दो दिन के अंदर ही विद्यालय में शिक्षक की तैनाती कर दी जाएगी।
हिंदी में गिनती नहीं लिख सके शिक्षक
पूर्व विधायक के स्कूल में पहुंचते ही वहां ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई। इसकी खबर खंड शिक्षा अधिकारी को लगी तो उन्होंने पास के प्राथमिक
स्कूल में तैनात एक अध्यापक को मौके पर व्यवस्था बनाने भेजा। बताया जाता है कि इस दौरान अध्यापक से हिंदी में गिनती लिखने की बात कही गई जो वह नहीं लिख सके।