फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘शिक्षा के माध्यम से सशक्त बन सकती है नारी’

विज्ञापन
कार्यक्रम में भाग लेती छात्राएं। - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
बेहट (सहारनपुर)। राजकीय महिला महाविद्यालय में सोमवार को अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत नारी सशक्तिकरण विषय पर संवाद हुआ। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ना होगा और अपने हक एवं अधिकारों के प्रति सजग रहते हुए समाज में अपना स्थान तय करना होगा। प्राध्यापकों एवं छात्राओं ने अपने विचारों के माध्यम से नारी सशक्तिकरण पर अपनी राय दी।
विज्ञापन

प्राचार्य डॉ. नीतू यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की जब भी बात की जाती है, तब सिर्फ राजनीतिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा होती है। लेकिन सामाजिक सशक्तिकरण की चर्चा नहीं होती। महिलाओं को दूसरे दर्जे का नागरिक माना जाता रहा है। उन्हें सिर्फ पुरुषों से ही नहीं बल्कि जातीय संरचना में भी सबसे पीछे रखा गया है। इन परिस्थितियों में उन्हें राजनीतिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त करने की बात बेमानी लगती है, भले ही उन्हें कई कानूनी अधिकार मिल चुके हैं। महिलाओं का जब तक सामाजिक सशक्तिकरण नहीं होगा, तब तक वह अपने कानूनी अधिकारों का समुचित उपयोग नहीं कर सकेंगी।
डॉ. यामिनी सक्सेना ने कहा कि शिक्षा एक ऐसा कारगर हथियार है, जो सामाजिक विकास की गति को तेज करता है। समानता, स्वतंत्रता के साथ-साथ शिक्षित व्यक्ति अपने कानूनी अधिकारों का बेहतर उपयोग भी करता है और राजनीतिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त भी होता है। इसलिए महिलाओं को शिक्षित होकर, शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनकर समाज में अपना स्थान तय करना होगा।
विज्ञापन

डॉ. यजुवेंद्र कुमार ने कहा कि यूरोप में महिलाएं आगे रहती है और पुरुष पीछे खड़े नजर आते है। अपने आप को शिक्षा के माध्यम से यूरोप की महिलाओं ने आत्मविश्वास पैदा कर इतना मजबूत किया है कि वह हर क्षेत्र में अग्रणी पंक्ति में खड़ी मिलती है। इसलिए यहां भी महिलाओं को अपने सशक्तिकरण के लिए शिक्षा को हथियार बनाना होगा।
डॉ. बेगराम ने उसने कहा कि समाज को अपनी नकारात्मक सोच में बदलाव करते हुए महिलाओं के प्रति अपनी सोच को सकारात्मक करते हुए उनकी शिक्षा पर ध्यान देना होगा, क्योंकि शिक्षित समाज ही अपना लक्ष्य निर्धारण कर सकता है और लक्ष्य निर्धारण से ही सशक्तिकरण संभव है। बीए प्रथम वर्ष की छात्रा आरती और शिल्पी एवं बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा विधि तोमर ने भी बेबाकी से महिला सशक्तिकरण पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि अभी भी समाज में लड़कियों के प्रति धारणा सही नहीं है। पेट में ही लड़कियों को मार दिया जाता है और यहीं कारण है कि लिंगानुपात का संतुलन बिगड़ रहा है। कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराधों में भी महिलाओं की भूमिका है। हमें कन्या भ्रूण जैसे अपराध और कुरीतियों पर नकेल कसनी होगी।
अपराजिता अभियान के तहत नारी सशक्तिकरण की, जो मुहिम शुरू की है, उससे समाज में महिलाओं की स्थिति को उजागर किया जा सकेगा और नारी सशक्तिकरण के लिए क्या होना चाहिए। इस पर चर्चा करने के लिए एक सांझा मंच भी मिलेगा। उन्हें पूरी उम्मीद है कि नारी गरिमा का सांझा संकल्प लेकर अमर उजाला द्वारा शुरू किया गया यह अभियान समाज में एक नई जागृति लेकर आएगा। - डॉ. नीतू यादव, प्राचार्य राजकीय महिला महाविद्यालय, बेहट।

बेहट में राजकीय महिला महाविद्यालय में अमर उजाला के अपराजिता अभियान के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण प- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें