सहारनपुर में भूजल स्तर के लगातार घटने से जिले भर में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी के बीच हैंडपंपों के हलक सूखना शुरू हो गए हैं। इतना ही नहीं, अनेक जगहों पर हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं।
यह पानी लोगों के लिए स्लो प्वाइजन साबित हो रहा है, जो अभी तक अनेक लोगों की जान ले चुका है। हैरत की बात यह है कि लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग के दावे भी फेल साबित हो रहे हैं।
नगर निगम क्षेत्र में पड़ने वाले दराकोटतला क्षेत्र में अनेक जगहों पर भूजल स्तर नीचे चले जाने की वजह से हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। गांव बिशनपुर में लगे सरकारी नलों में से ज्यादातर के हलक सूख गए हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मंदिर परिसर में लगा हैंडपंप सालों से बंद है। इसके अलावा सड़क किनारे लगा एक और सरकारी हैंडपंप बूंद-बूंद पानी दे रहा है। कुछ महीने पहले इससे खूब पानी निकलता था।
इसी प्रकार गांव हसनपुर में भी कई हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। ग्रामीण ईश्वरपाल, मदन सिंह ने बताया कि अब से 15 या 20 साल पहले हैंडपंप 20 फुट गहराई से पानी देते थे, लेकिन अब उन्हें 100 से 150 फुट नीचे बोरिंग कराना पड़ रहा है।
रामपुर मनिहारान। रामपुर मनिहारान के गांव नंदपुर, जानखेड़ा, चकवाली, आमवाला, भांकला, पिलखनी समेत अनेक गांवों के हैंडपंपों का पानी सूख चुका है। इनके अलावा कई हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं, जिसे पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं।
हालांकि जल निगम की टीम दूषित पानी देने वाले हैंडपंपों पर लाल निशान लगाकर चेतावनी जारी कर चुकी है। गांव नंदपुर के प्रधान महिपाल सैनी कहते हैं कि खराब व सूख चुके हैंडपंप की शिकायत कई बार तहसील दिवस में अधिकारियों से की जा चुकी है, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई है।
चकवाली में ग्राम प्रधान की शिकायत पर गांव पहुंची जल निगम की टीम भी खाना पूर्ति कर लौट आई। प्रधान प्रतिनिधि नकुल चौधरी का कहना है कि सरकारी अमला अधिकारियों की फटकार पर मौके पर तो जाता है, मगर समस्या का समाधान नहीं हो सका है। पिलखनी में कई हैंडपंप सूखे पडे़ हैं। ग्रामीण पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।
एनजीटी के निर्देशों पर क्षेत्र में गांव दर गांव लगे सरकारी हैंडपंपों की जांच कराई गई थी। दूषित पानी देने वाले हैंडपंपों को उखाड़ने और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने के आदेश जारी हुए थे।
मगर अभी तक ऐसे अनेक हैंडपंपों को उखाड़ा नहीं गया है। ऐसे में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। बड़गांव क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले एक दशक में भूजल स्तर 35 फुट घटा है।
वर्तमान में 135 फुट पर भी साफ पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में बड़गांव क्षेत्र के करीब 52 गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। क्षेत्र से गुजर रही हिंडन नदी का पानी जहरीला हो गया है।
जिसकी वजह से आसपास के गांवों के हैंडपंपों और नलकूपों का पानी पीला हो चुका है। महेशपुर के प्रधान पप्पू उर्फ श्याम सिंह का कहना है कि गांव में करीब 70 सरकारी हैंडपंप लगे हैं, जिनका पानी पीने के लायक नहीं बचा है।
बड़गांव के ग्राम प्रधान सुखपाल शर्मा का कहना है कि गांव में 70 में से दस हैंडपंप रिबोर के लिए चिह्नित किए गए हैं। गांव दल्हेड़ी के प्रधान सोनू राणा, शिमलाना के प्रधान बीरपाल सिंह, चंदपुर के प्रधान रविंद्र सिंह आदि का कहना है कि हैंडपंप रिबोर नहीं हुए हैं।
एनजीटी के आदेश पर जल निगम ने पिछले साल नानौता के भनेड़ा खेमचंद गांव से दूषित पानी देने वाले 15 हैंडपंपों को उखाड़ा था। प्रशासन के प्रयास से गांव में तीन सबमर्सिबल लगाए गए हैं, जो ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
इसके अलावा जल निगम ने गांव में पेयजल के लिए टंकी का प्रस्ताव शासन को भेजा हुआ है। अभी तक शासन से पैसा रिलीज न होने की वजह से काम आगे नहीं बढ़ सका है।