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जो अपना हाल है... किताब में बयां होगी शख्सियत

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सरदार अनवर - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जो अपना हाल है, सब अपनी हरकतों से है। दुआ किसी की नहीं, बददुआ किसी की नहीं। इस जैसे बहुत से शेर और कविताएं हैं, जो वरिष्ठ रंगकर्मी सरदार अनवर की यादें हैं। इन यादों को किताब की शक्ल दी जाएगी। फिल्म अभिनेता इनामुल हक ने उनके शेर और कविताओं का संग्रह किया है। जो अपना हाल है के नाम से उस किताब को प्रकाशित कराया जाएगा। इस किताब में सरदार अनवर की शख्सियत से लेकर जिंदगी के उतार चढ़ाव, रंगमंच के अनुभव और तमाम ऐसी बातें होंगी, जो यादगार रहेंगी।
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दरअसल, शहर के ढोली खाल मोहल्ले में रहने वाले वरिष्ठ रंगकर्मी सरदार अनवर का शुक्रवार को बीमारी के चलते इंतकाल हो गया। वह शानदार और बहुआयामी शख्सियत के मालिक थे। एक अच्छे शायर और बड़े ट्रेड यूनियन लीडर थे। रंगमंच की बुलंदी पर पहुंचने के बावजूद फक्कड़ मिजाज उनकी सादगी को बयां करता था। सरदार अनवर रंगकर्मी होने के साथ ही शेरो शायरी में भी खूब माहिर थे, उनके शेर मौजूदा दौर को प्रतिबिंबित करते थे। जब दंगा होता तो अमन का पैगाम देने वाले शेर वह दीवारों पर भी लिखवाया करते थे। फिल्म अभिनेता इनामुल हक ने बताया कि सरदार साहब की याद में वह किताब का प्रकाशन कराएंगे, जिसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। प्रयास करेंगे कि दो अक्तूबर को सरदार साहब के जन्मदिन पर किताब लांच की जाए।
नके शेर जो आज भी लोगों को याद हैं
1- मंदिर, मस्जिद, दाढ़ी, चोटी, काट रहे हैं बोटी-बोटी
बांट रहे हैं हम बच्चों को छीन रहे हैं सबकी रोटी।
2- अपने अल्लाह से भी पर्दा रख, घर में रोटी नहीं तो रोजा रख।
दिल में हर एक से चाहे कीना रख, अपना बर्ताव सबसे अच्छा रख।।
सांप्रदायिक सौहार्द
सहारनपुर में जब कोई सांप्रदायिक तनाव हुआ तो, सरदार अनवर लोगों को समझाने या नुक्कड़ नाटक कराने निकल पड़ते थे। मार्च और दिसंबर 1992 में सहारनपुर में दो बड़े सांप्रदायिक दंगे हुए। मार्च का दंगा सियासी था और दिसंबर का अयोध्या कांड को लेकर हुआ था। सरदार अनवर दंगा प्रभावित क्षेत्रों में जाकर अपनी टीम के साथ डटे रहते थे। उस दौर में उन्होंने पोस्टरों पर शेर लिखवाया था, दाढ़ी में चोटी उलझा दी, देखो बात कहां पहुंचा दी।
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समर्पण और सादगी की मिसाल रहे : जोशी
सरदार अनवर के साथ रंगमंच पर अभिनय करने वाले वरिष्ठ रंगकर्मी विजेश जोशी का कहना है कि आईटीसी के ड्रामैटिक क्लब के समय से ही वह सरदार अनवर के साथ रहे। अनेक नाटकों में साथ अभिनय किया। सरदार अनवर सादगी और समर्पण की मिसाल थे, उनकी बदौलत कई कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिला।
छोटे से मकान में गुजार दी जिंदगी
सहारनपुर। मोहल्ला ढोलीखाल में सरदार अनवर का करीब 80 वर्गगज में बना मकान है, जिसमें उन्होंने पूरी जिंदगी गुजार दी। उनके परिवार में चार बेटियां हैं, जिनमें सिबली, उर्फी, रूमी और यख्ता। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि एक बेटी अविवाहित है।

सरदार अनवर के पड़ोसी टीपू- फोटो : SAHARANPUR

ढोली खाल स्थित सरदार अनवर का मकान- फोटो : SAHARANPUR

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