बड़गांव/छुटमलपुर। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर शहरों को जाने वाले रास्ते से पहले उनके नाम के संकेतक लगाने में बड़ी लापरवाही की गई है। बड़गांव इंटरचेंज के पास देवबंद और नानौता की दिशा बताने वाले संकेतक उल्टे लगा दिए गए हैं। ऐसे ही छुटमलपुर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के पश्चिमी में स्थित गांव बुड्ढाखेड़ा पुंडीर को पूर्व में दर्शा दिया गया है। 100 किमी की रफ्तार से दौड़ रहे कार चालक इन उल्टे बोर्ड को देखकर भ्रमित हो रहे हैं।
दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक 12000 करोड़ रुपये की लागत से एक्सप्रेसवे बनाया गया है। 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण किया था। इसके बाद इस पर टोल वसूली भी शुरू हो गई है, लेकिन शहरों और गांवों को जाने वाले रास्तों पर संकेतक लगाने में लापरवाही बरती गई है। बड़गांव क्षेत्र के वाहन चालकों जनेश सिंह, डॉ. ईश्वर राणा, सुरेंद्र सिंह, दीपक आदि ने बताया एक्सप्रेसवे पर देवबंद की तरफ जाने वाले बोर्ड का निशान नानौता की तरफ दर्शाया गया है। इसके चलते एक्सप्रेसवे से नीचे उतरते ही देवबंद जाने वाले वाहन चालक नानौता की तरफ और ठीक ऐसे ही नानौता जाने वाले वाहन चालक देवबंद की तरफ चल पड़ते हैं। ऐसे में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे ही चमारीखेड़ा टोल प्लाजा से देहरादून की तरफ चलते ही एक्सप्रेसवे पर गांव बुड्ढाखेड़ा पुंडीर का रास्ता पूर्व की तरफ दर्शाया गया है, जबकि वह रास्ता रजापुर और करालटी गांवों की तरफ जाता है। बुड्ढाखेड़ा पुंडीर गांव पश्चिमी की तरफ पुलिस चौकी के पीछे स्थित है। यहां तो बोर्ड भी पुलिस चौकी के पास लगाए जाने की बजाए रेडी गांव के रास्ते पर लगा दिया गया है। गांव का नाम भी गलत बुड्ढा खेड़ा पुंडीर लिखा है। ऐसे में क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से अपरिचित नए आने वाले वाहन चालकों को रात के वक्त ज्यादा परेशानी आती है। ग्रामीणों का कहना है कि एक्सप्रेसवे शुरू होने से पहले ही सभी साइनेज की जांच होनी चाहिए थी। टोल वसूली शुरू हो गई, लेकिन बेसिक सुरक्षा इंतजाम अधूरे हैं। अब उल्टे बोर्ड हादसे को न्योता दे रहे हैं।
यह बोले अधिकारी
प्रोजेक्ट मैनेजर शिवमोहन सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर गलती से कुछ संकेतक उल्टे लग गए हैं तो शीघ्र ही उन्हें ठीक कराया जाएगा।