सहारनपुर। वेटलैंड को कब्जों से बचना के लिए उन्हें संरक्षित किया जाएगा। जिले में करीब छोटे-बडे 50 वेटलैंड ऐसे हैं, जहां पर देशी से लेकर विदेशी पक्षी सर्दियों में आते हैं। इनमें से सात वेटलैंड को अधिसूचित करने की तैयारी हैं।
जिले के वेटलैंड नवंबर से फरवरी माह तक विदेशी पक्षियों से गुलजार रहते हैं। वेटलैंड में हथिनीकुंड वेटलैंड काफी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी वेटलैंड है। जहां पर पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की मौजूदगी रहती है। सरकार अब इन वेटलैंड को संरक्षित करने और कब्जे से बचाने की तैयारी में हैं। जिले के भारीदींदारपुर, अंबेहटा शेख, मलकुपर, गदरहेड़ी(सरसावा), कैलाशपुर, हलालपुर, बिनाखेड़ी, बीड़वी और खेड़ामुगल के वेटलैंड को संरक्षित किया जाएगा। इन वेटलैंड के अधिसूचित होने के बाद इन पर सीवेज या औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक, पॉलिथीन आदि का प्रयोग प्रतिबंधित होगा। इसके साथ ही इन स्थलों पर स्थायी निर्माण, खनन, भूजल का दोहन करने पर भी रोक लग जाएगी। प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयां भी इन वेटलैंड के आस-पास नहीं लग पाएंगी। इन वेटलैंड के अधिसूचित होने से भूजल में बढ़ोतरी होगी। वेटलैंड प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करते हैं। इससे गंदगी, रसायन को सोखकर जल को शुद्ध करते हैं।
- जिले में इन प्रजातियों के पक्षियों की रहती है भरमार
1. सफ़ेद गले वाला किंगफ़िशर
2. लाल वेंटेड बुलबुल
3. जंगल बैबलर
4. कॉमन कबूतर
5. लिटिल रिग्रेट
6. रूफ्स ट्री पाई
7. कैटल रिग्रेट
8. टेलर बर्ड
9. इंडियन रॉबिन
10. ग्रे वैगटेल
- वर्जन
जिले में कई छोटे-बड़े वेटलैंड है। अभी तक इनके अधिसूचित होने की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। सर्दियों के मौसम में वेटलैंड विदेशी पक्षियों से गुलजार रहते हैं। वेटलैंड के अधिसूचित होने से पर्यावरण को निश्चय की फायदा होगा।
- शुभम सिंह, डीएफओ