2022 के नतीजों में भाजपा का दबदबा, दो सीटों पर सपा की जीत
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सहारनपुर जिले की सात सीटों में भाजपा ने पांच और सपा ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, अलग-अलग सीटों पर जीत का अंतर राजनीतिक मुकाबले की अलग-अलग तस्वीर पेश करता है।
नकुड़ विधानसभा सीट पर भाजपा की जीत महज 315 वोटों के अंतर से हुई थी। इसके उलट बेहट में सपा ने 37,880 वोट और सहारनपुर देहात में 30,745 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। ये आंकड़े बताते हैं कि जिले में कुछ सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा, जबकि अन्य सीटों पर विजेता दल को बड़ी बढ़त मिली।
ऐसे में 2027 के चुनाव में उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय मुद्दों और विभिन्न सामाजिक समूहों का समर्थन हासिल करने की रणनीति अहम हो सकती है।
2024 लोकसभा चुनाव ने बदली तस्वीर, कई क्षेत्रों में अलग रुझान
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन के उम्मीदवार इमरान मसूद ने सहारनपुर सीट पर जीत दर्ज की। विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में कांग्रेस को बेहट में 38,229, सहारनपुर नगर में 5,016 और सहारनपुर देहात में 44,626 वोटों की बढ़त मिली।
वहीं, देवबंद में भाजपा को 21,051 और रामपुर मनिहारान में 1,557 वोटों की बढ़त मिली। इन आंकड़ों से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं के रुझान के अंतर का पता चलता है। हालांकि, लोकसभा चुनाव के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव के नतीजों का संकेत नहीं माना जा सकता।
2027 में दलों के सामने चुनौती होगी कि वे लोकसभा चुनाव में मिले समर्थन को विधानसभा स्तर पर किस तरह बरकरार रखते हैं और स्थानीय समीकरणों के अनुसार अपनी रणनीति बनाते हैं।
बछरावां में लोगों का अभिवादन करते सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारा बनेगा अहम मुद्दा
इमरान मसूद की नई जिम्मेदारी के बाद कांग्रेस के लिए पश्चिमी यूपी में संगठन मजबूत करने और अपनी चुनावी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर देखा जा रहा है। वहीं, सपा और कांग्रेस के बीच 2027 में सीटों के बंटवारे को लेकर नेताओं के बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय रहे हैं।
यदि दोनों दल गठबंधन में चुनाव लड़ते हैं, तो सीटों का चयन और उम्मीदवारों पर सहमति अहम होगी। दूसरी ओर, कांग्रेस अपने संगठन और चुनावी आधार का विस्तार करती है तथा बसपा भी अपने सामाजिक आधार के साथ मैदान में उतरती है, तो कई सीटों पर वोटों का बंटवारा चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, अभी चुनाव में समय है और अंतिम गठबंधन, उम्मीदवारों तथा सीटों के बंटवारे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में मौजूदा समीकरणों को संभावित राजनीतिक संकेतों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
एमएलसी चुनाव के लिए मेरठ से नामांकन करते नेता
- फोटो : अमर उजाला
एमएलसी चुनाव: शिक्षक और स्नातक सीटों पर भाजपा-सपा की टक्कर, कांग्रेस-बसपा ने नहीं उतारे उम्मीदवार
मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों के चुनाव में भाजपा और सपा के उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस, बसपा और आजाद समाज पार्टी (आसपा) जैसे दलों ने उपलब्ध जानकारी के अनुसार अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। शिक्षक संगठनों के प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं होने के कारण उन्हें निर्दलीय श्रेणी में रखा जाता है।
शिक्षक एमएलसी सीट पर भाजपा-सपा के उम्मीदवार
शिक्षक एमएलसी सीट पर भाजपा ने वर्तमान एमएलसी श्रीचंद शर्मा और सपा ने डॉ. नितिन तोमर को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट से डॉ. सुशील पुंडीर और ठकुराई गुट से सुशील चौधरी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन कर चुके हैं।
इस सीट पर शिक्षक संगठनों की सक्रियता के कारण मुकाबला केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। हालांकि, कांग्रेस, बसपा और आसपा की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारे जाने से चुनावी मैदान में भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के साथ शिक्षक संगठनों के उम्मीदवार भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
स्नातक एमएलसी सीट पर भी कई उम्मीदवार मैदान में
स्नातक एमएलसी सीट पर भाजपा ने वर्तमान एमएलसी दिनेश गोयल और सपा ने प्रमेंद्र भाटी एडवोकेट को उम्मीदवार बनाया है। माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट से डॉ. अमित जैन और ठकुराई गुट से डॉ. राहुल कुशवाहा भी चुनाव मैदान में हैं।
पहले कांग्रेस से टिकट का दावा करने वाले विक्रांत वशिष्ठ एडवोकेट ने भी अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस सीट पर भी कांग्रेस समेत अन्य दलों की ओर से आधिकारिक उम्मीदवार नहीं उतारे जाने की जानकारी है।
शिक्षक संगठनों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका अहम
शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के अलावा शिक्षक संगठनों से जुड़े उम्मीदवार भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबले में राजनीतिक दलों के संगठन के साथ शिक्षक संगठनों की सक्रियता और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत समर्थन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
दोनों सीटों पर मुकाबले की तस्वीर नामांकन, चुनाव प्रचार और मतदाताओं के रुझान के साथ और स्पष्ट होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा और सपा ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कई अन्य दलों ने चुनाव से दूरी बनाई है।