शाकंभरी। बृहस्पतिवार रात प्रकृति ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि अचानक आई बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को जलमग्न कर दिया। 30 साल में कभी इतना भयानक मंजर नहीं देखा। हर तरफ मदद के लिए चीख-पुकार मची हुई थी। यह कहना है कि अखिल भारतीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी संत भैरवतंत्र संत सहजानंद महाराज का, जो इस आपदा के प्रत्यक्षदर्शी रहे।
उन्होंने बताया कि रात करीब 12 बजे शिवालिक पहाड़ियों की तरफ से तेज गर्जना सुनाई दी। पहले लोगों को लगा जैसे बादल फटने की आवाज हो, लेकिन कुछ ही देर में शाकंभरी नदी मौत का सैलाब बनकर दौड़ पड़ी। पानी का बहाव इतना तेज था कि मंदिर परिसर, कैंटीन और आश्रम की सीढ़ियां देखते ही देखते डूबने लगीं। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पानी का वेग इतना खतरनाक था कि बड़े-बड़े पत्थर और मलबा भी बहकर आ रहा था। कई लोग रातभर जागकर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर रहे। बाढ़ के कारण पूरे क्षेत्र में भय और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। संत सहजानंद महाराज ने लोगों से अपील की है कि इस आपदा की घड़ी में अफवाहों से बचें, एक-दूसरे की मदद करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। वहीं प्रशासन ने भी लोगों को नदी और पहाड़ी क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी दी है।
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समझ ही नहीं आया कि आखिर कहां से आया पानी : श्रद्धालु
यमुनानगर के रहने वाले सुमित अपने परिवार और ग्रामीणों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली में आए थे। पानी के सैलाब में उनका ट्रैक्टर भी 500 मीटर तक बह गया। किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचाई। इसी तरह देवबंद के कुरड़ी घायना गांव के रहने वाले कुलदीप और रोहताश की बाइक भी पानी में बहकर क्षतिग्रस्त हो गई। श्रद्धालुओं का कहना है कि कुछ पल के लिए समझ ही नहीं आया कि आखिर क्या माजरा है। किसी तरह संभले और खुद व परिवार के सदस्यों को बचाया।
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श्रद्धालुओं ने नहीं दिया एनाउंसमेंट का ध्यान
बाढ़ आने से करीब आधा घंटे पहले एनाउंसमेंट किया गया था कि मौसम खराब है। सभी सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाए, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी भी कि किसी ने भी एनाउंसमेंट पर ध्यान नहीं दिया। पुलिसकर्मियों ने भी कोई जहमत नहीं उठाई। केवल एनाउंसमेंट पूरी कर औपचारिकता पूरी कर दी। उधर, इस आपदा के बाद प्रशासन ने भूरादेव, नागल माफी और जसमौर चौराहे पर बैरिकेडिंग कर पुलिस पिकेट तैनात कर दी है।