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वुडकार्विंग उद्योग को लग सकता है बड़ा झटका

Tue, 22 Nov 2016 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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black money
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सहारनपुर में विश्वविख्यात वुडकार्विंग उद्योग को नोटबंदी के चलते बड़ा झटका लग सकता है। क्रिसमस के त्योहार के चलते यूएसए और यूरोप से सहारनपुर के वुडकार्विंग उद्योग को करीब 100 करोड़ रुपये का आर्डर है।  
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मगर, बाजार में नोट की कमी के चलते ना तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही रॉ मैटेरियल ही मिल पा रहा है। ऐसे में अब एक्सपोटर्स डिमांड को पूरा कर पाने के लिए ऐडी चोटी का जोर लगा रहे हैं।
  उन्हें यह भी डर सता रहा है कि अगर समय पर माल एक्सपोर्ट नहीं हुआ तो कैंसिल भी हो सकता है। कुल मिलाकर नोटबंदी से वुडकार्विंग उद्योग में उहापोह है और बड़ा झटका भी लग सकता है।
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शहर के वुडकार्विंग बाजार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। यहां लकड़ी की नक्काशी दुनिया भर में पसंद की जाती है। खासकर क्रिसमस का मौका इस उद्योग का पिक टाइम माना जाता है।
  यूएसए और यूरोप के देशों में करीब 100 करोड़ से ज्यादा के माल  की डिमांड इस सीजन में होती है। मगर, नोटबंदी के चलते दैनिक मजदूरों को पेमेंट करना मुश्किल हो गया है। 
उधर, कारीगर काम की बजाय बैंकों की लाइन में लग गए हैं। ऐसे में डिमांड के मुुताबिक माल तैयार करने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है। 
वुडकार्विंग एसोसिएशन के पदाधिकारी इरफानुल हक ने बताया कि सहारनपुर के वुडकार्विंग उद्योग का यह समय पिक टाइम माना जाता है।
  यहां से माल तैयार होकर नवंबर के अंतिम सप्ताह तक में जाता है। मगर, नोटबंदी के बाद कारीगर काम छोड़कर बैंकों की कतार में हैं। जो काम पर आ रहे हैं उन्हें पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
  कारण, हमारे पास भी सीमित विकल्प होने के कारण उन्हें भुगतान नहीं हो रहा है। ऐसे में अब आर्डर कैंसिल होने का डर भी सताने लगा है। 
वुडकार्विंग एक्सपोर्टर गुलफाम का कहना है कि पैसे के चलते आर्डर को पूरा करने में दिक्कत आ रही है।
    सबसे बड़ी बात यह है कि वुडकार्विंग के कारीगर को हर दिन भुगतान करना होता है। अगर हम उसके अकाउंट में भी पैसे डालते हैं तो वह उसके निकालने के लिए बैंक पहुंच जाता है और पूरा दिन वहीं गुजर रहा है। ऐसे में क्रिसमस का आर्डर भी पूरा नहीं हो पाता।      वुडकार्विंग एसोसिएशन के अध्यक्ष शेख फैजान का कहना है कि विदेशों में सहारनपुर के वुडकार्विंग की पहचान के साथ ही यहां की साख भी है। मगर, मौजूदा हालात में ज्यादातर संस्थानों में आर्डर पेंडिंग हैं। तय समयसीमा पर माल नहीं भेजा गया तो उसके कैंसल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। आर्डर कैंसल होने पर सहारनपुर की साख पर भी असर पड़ेगा। 
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