सहारनपुर के देवबंद में आगरा के मोहल्ला आजमपाड़ा के रहने वाले गुलचमन शेरवानी का राष्ट्रगीत वंदेमातरम और देश के तिरंगे झंडे से प्रेम करने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि उनका तिरंगे से प्रेम राष्ट्र से प्रेम है और सभी लोगों को तिरंगे का सम्मान करना चाहिए, लेकिन जहां तक वंदेमातरम का मसला है तो शरीयत इसे गाने की इजाजत नहीं देती।
ऑल इंडिया मजलिस उलमा के महासचिव मौलाना कारी रहीमुद्दीन कासमी का कहना है कि आगरा के गुलचमन शेरवानी का तिरंगे से मोहब्बत का मसला है तो यह मुल्क से वफादारी है। तिरंगा मुल्क की शान है और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए, लेकिन अगर वंदेमातरम गाना या उसकी धुन पर कुछ करने का सवाल है तो इस्लाम धर्म इसका कतई इजाजत नहीं देता,
लेकिन इसके साथ ही इस्लाम धर्म में यह भी कहा गया है कि मुल्क की जितनी मोहब्बत की जा सके वो कम है। मुफ्ती याद इलाही कासमी का कहना है कि तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज है और हम सब इसका सम्मान करते हैं और समय समय पर इसको इस्लामिक शिक्षण संस्थानों और दूसरे कार्यक्रमों में शान के साथ फहराते हैं।
जहां तक आगरा के गुलचमन शेरवानी का मसला है तो तिरंगे का कपड़ा बनाकर पहनना मेरी नजर में तिरंगे का अपमान है। वतन से मोहब्बत के लिए वंदेमातरम गाना या तिरंगे के कपड़े बनाकर पहनने की जरूरत नहीं है। हम अपने मुल्क से कितनी मोहब्बत करते हैं यह सभी जानते हैं।