सहारनपुर। दीपावली खुशियों और दीपों का त्योहार है। एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटें, लेकिन आतिशबाजी चलाते समय विशेष सावधानियां बरतें। थोड़ी सी लापरवाही जिंदगी के लिए घातक हो सकती है। खुद को सुरक्षित रखते हुए दीपावली पर आतिशबाजी करें।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि सामान्य व्यक्ति के कान की क्षमता 60 डेसिबल होती है। तेज डेसिबल के बम से नींद, बहरापन, बेचैनी, हार्ट अटैक और बीपी बढ़ जाता है। ग्रीन लाइट निकलने वाले पटाखों में बेरियम होता है, जो जहरीला है। ब्लू लाइट निकलने वाले पटाखों में कॉपर होता है, जो कैंसर करता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई पटाखा पहली बार में न जले तो 15 से 20 मिनट तक इंतजार करें। फिर उसे पानी की बाल्टी में डाल दें। तुरंत जलाने का प्रयास न करें।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रताप सिंह का कहना है कि पटाखे जलाते समय आंखों पर चश्मा लगाएं। पटाखे खुले स्थान पर जलाएं। घर में न जलाएं। पटाखे जलाने वाले स्थान पर पानी एक बर्तन में भरकर रखें।
पटाखे हाथ में लेकर न छुडाएं। कपड़ों से दूर रखें। पटाखे वाहनों से दूर रखें। इसके अलावा अगर कोई दुर्घटना होता है तो तुरंत स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग के कंट्रोल में सूचना दें।