मजलिस-ए-शूरा की बैठक के दौरान दारुल उलूम में हुए हंगामे के मामले में शूरा ने जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि प्रबंधतंत्र ने संस्था का बचाव करते हुए कहा कि हंगामा करने वाले छात्र नहीं बल्कि कुछ शरारती तत्व हैं, जो प्रबंधतंत्र और छात्रों के बीच गहरी खाई पैदा कर दारुल उलूम की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।
सोमवार को मजलसि-ए-शूरा के बजट सत्र के दौरान कुछ छात्रों ने दारुल उलूम के भीतर हंगामा करते हुए शिक्षा विभाग में तालाबंदी करने के साथ ही एक जगह पर आगजनी कर दी थी। प्रकरण को लेकर सोमवार की देर रात तक मजलिस-ए-शूरा की बैठक चलती रही।
अंत में शूरा सदस्यों ने पूरे मामले की व्यापक स्तर पर जांच कराने के आदेश दिए हैं। मंगलवार को दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने बयान जारी करके कहा कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आगजनी और हंगामा करने वाली घटना के पीछे छात्रों का नहीं बल्कि शरारती तत्वों का हाथ हो सकता है।
जो संस्था प्रबंधतंत्र और छात्रों के बीच गहरी खाई पैदा कर दारुल उलूम की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। इस संबंध में मजलसि-ए-शूरा ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच कर शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के आदेश दिए हैं। संस्था द्वारा दोनों घटनाओं की व्यापक स्तर पर जांच कराई जाएगी। जिसके बाद ही सही तथ्य व सत्यता सामने आएगी। उन्होंने बताया कि जांच की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।