सहारनपुर। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी परिवारों के लिए अच्छी खबर यह है कि अब उन्हें केवल पांच नहीं, बल्कि 15 लाख रुपये तक का इलाज फ्री मिल सकेगा। ऐसे मरीजों जिनका इलाज निर्धारित पांच लाख से अधिक आएगा उसके लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि से सहायता ली जाएगी।
योजना के तहत मरीज को अधिकतम पांच लाख रुपये का इलाज मिलता है। जिला स्तर पर योजना के नोडल अधिकारी डॉक्टर सुशील गुप्ता ने बताया कि किडनी, हार्ट और लीवर ट्रांसप्लांट की स्थिति में कई लाभार्थी मरीजों का खर्च पांच लाख रुपये से अधिक बैठता है। मगर योजना में केवल पांच लाख तक के इलाज की व्यवस्था होने की वजह से मरीजों के सामने परेशानी आ रही थी। इसे लेकर एम्स समेत कई बड़े अस्पतालों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखे, जिसके बाद मंत्रालय ने लाभार्थियों की जिंदगी बचाने के लिए 15 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए पांच लाख रुपये से ऊपर खर्च होने वाले पैसे की भरपाई राष्ट्रीय आरोग्य निधि से की जाएगी।
आयुष्मान योजना पर एक नजर
-- कुल 115023 लाभार्थी परिवार (ग्रामीण क्षेत्र के 70476 और शहरी क्षेत्र के 44547)
-- अनुबंधित अस्पतालों की संख्या 42, जिनमें 24 सरकारी और 18 निजी अस्पताल।
-- अभी तक 124000 गोल्डन कार्ड बन चुके हैं (प्रदेश में 10 वीं रैंक)
-- जिले में अभी तक 3880 मरीज पा चुके याजना का लाभ (28593774 रुपये खर्च)।
-- अभी तक 91825 प्लास्टिक कार्ड वितरित।
लाभार्थियों से अपील
सहारनपुर में आयुष्मान भारत योजना से 115023 परिवार जुड़े हैं, जिनके सदस्यों की अनुमानित संख्या करीब छह लाख है। मगर अभी तक 20 फीसदी लोगों ही ने अपने कार्ड बनवाए हैं। ज्यादातर लोग योजना की चिट्ठियां घरों में रखे बैठे हैं। नोडल अधिकारी ने बताया कि जब तक कार्ड हाथ में नहीं होगा, तब तक कोई भी लाभार्थी योजना का लाभ नहीं ले सकता है। ऐसे में प्रत्येक लाभार्थी परिवार को चाहिए कि वह प्रत्येक सदस्य का गोल्डन कार्ड बनवाकर रखे, जिससे इमरजेंसी होने पर तुरंत इलाज की सुविधा मिल सके।
आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के इलाज का प्रावधान है, मगर विशेेष परिस्थितियों में पांच लाख से अधिक खर्च आने पर सरकार राष्ट्रीय आरोग्य निधि से सहायता देगी। इसके अलावा लोग गोल्डन कार्ड बनवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। उन्हें चाहिए कि तुरंत अपने गोल्डन कार्ड बनवाकर अपने पास रखें।
डॉक्टर सुशील गुप्ता, नोडल अधिकारी।