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यूपी: संत बाबा बंशी वाले हुए ब्रह्मलीन, अस्पताल में ली अंतिम सांस, देशभर में हैं उनके अनुयायी

Thu, 08 Jul 2021 09:51 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

सूचना मिलने पर गुरुवार सुबह से ही सरसावा क्षेत्र के गांव सोराना स्थित आश्रम पर उनके अनुयायी पहुंचने शुरू हो गए। 
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सहारनपुर: संत बाबा बंशी वाले - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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संत बाबा बंशी वाले ब्रह्मलीन हो गए हैं। वह कई दिन से अस्वस्थ होने के कारण सहारनपुर के दिल्ली रोड स्थित मेडिग्राम अस्पताल में भर्ती थे, यहां बुधवार देर रात 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। इसकी सूचना मिलने पर गुरुवार सुबह से ही सरसावा क्षेत्र के गांव सोराना स्थित आश्रम पर उनके अनुयायी पहुंचने शुरू हो गए। 

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वहीं बाबा बंशी वाले के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे भक्तों की आंखें नम हुईं। भक्तों ने हाथ जोड़कर बाबा को नमन किया। इस दौरान कोई फूल चढ़ा रहा तो कोई नकद दक्षिणा। बताया गया कि दोपहर में दो बजे बाबा का अंतिम संस्कार यमुना नदी के घाट पर किया जाएगा। बाबा के अंतिम दर्शन के लिए आम भक्तों के अलावा राजनीतिक लोग भी पहुंच रहे हैं। प्रदेश सरकार में आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी के अलावा कई राजनीतिक लोग पहुंचे हैं।

उधर, बाबा बंशी वाले की अंतिम यात्रा के लिए भक्त पुष्प वर्षा की तैयारी में जुटे हैं। अनेक महिलाएं फूल मालाओं से फूल अलग कर रही हैं। सौराना गांव में अंबाला हाईवे पर दूर तक भक्तों की लाइन लगी है। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस को भी तैनात कर दिया गया है। सौराना गांव में बाबा के आश्रम को देव स्थल शिव मंदिर कहा जाता है। बताया गया कि बाबा बंशी वाले भागवत कथा वाचक थे और जहां भी कथा करने जाते थे तो वहां देशी घी का भंडारे का आयोजन कराते थे। देशभर में उनके अनेक अनुयायी हैं। बाबा बंसी वाले खुद को मारवाड़ बताते थे और गृहस्थ जीवन भी उनका रहा है। इसी कारण उनके अनुयायी और भक्तों द्वारा बाबा का दाह संस्कार करने का निर्णय लिया गया है।
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संत बाबा बंशी वाले पटना के रहने वाले थे। भक्त उनको सिर्फ बाबा बंशी वाले के ही नाम से जानते हैं। बाबा के बारे में बताया गया कि वह वैश्य वर्ग से थे। उनके यहां 25 साल से साथ रहने वाले मामचंद ने बताया कि बाबा का यही कहना था कि कोई भूखा ना रहे। इसी कारण बाबा बंशी वाले जब भी किसी जगह पर भागवत कथा कार्यक्रम को जाते थे तो उनके साथ भंडारा करने वाली पूरी टोली होती थी। भंडारा अनवरत चलता था। बाबा बंशी वाले ने हरिद्वार में मां अन्नपूर्णा धर्मशाला भी बनवाई, जो बहुमंजिला है और लिफ्ट भी लगी हैं।

बाबा बंशी वाले कृष्ण भक्त थे। बताया जाता है कि 38 साल पूर्व वह यमुना नदी किनारे पर टहलते हुए कुटिया वाले बाबा को मिले थे। कृष्ण भक्त होने के कारण ही कुटिया वाले बाबा ने उन्हें बाबा बंशी वाले नाम दिया था।

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