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बड़ा खुलासा: 1994 से ठिकाने बदलकर रहे बांग्लादेशी पिता-पुत्र, भारत में कई लोगों की करा चुके हैं घुसपैठ

Sun, 14 Mar 2021 12:56 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

  • सहारनपुर में 1994 से ठिकाने बदल-बदलकर रहे बांग्लादेशी पिता-पुत्र 
  • अब एटीएस की रडार पर हैं कई बांग्लादेशी नागरिक 
  • कई लोगों की भारत में घुसपैठ करा चुके हैं आरोपी 
  • आरोपियों की स्थानीय पुलिस को नहीं लग रही भनक
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सहारनपुर से पकड़े गए संदिग्ध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एटीएस द्वारा पकड़े गए बांग्लादेशी पिता और पुत्र वर्ष 1994 से सहारनपुर में ठिकाने बदल-बदलकर रह रहे थे, जो कई बांग्लादेशियों की भारत में घुसपैठ करा चुके हैं। अब एटीएस की रडार पर यहां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी आ गए हैं। आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर पहचान पत्र बनवाने में नदीम कॉलोनी का पता दर्शाया है, जबकि यह एकता विहार कॉलोनी में लंबे समय तक रहे हैं। 

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वहीं थाना कुतुबशेर और कोतवाली मंडी पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। एटीएस ने बांग्लादेशी निवासी तनवीर और उसके पिता उमर मोहम्मद उस्मान को नदीम कॉलोनी से पकड़ने का दावा किया है, जो 1994 से सहारनपुर में कई जगहों पर ठिकाने बदलकर रहे हैं। कुछ समय से यह आरोपी एकता विहार कॉलोनी में रह रहे थे, लेकिन यहां से भी कुछ दिन से गायब थे। इनके पास मिले पहचान पत्र में नदीम कॉलोनी में दर्शाया है। 

एकता विहार निवासी रिहान और शाहवेज ने बताया कि यह दोनों कुछ समय पूर्व तक उनके घर के नजदीक ही एक मकान में रहते थे, इसमें दूसरे किराएदार भी रहते हैं, लेकिन बाद में यहां से किसी दूसरी जगह चले गए। इससे पूर्व आरोपी नदीम कॉलोनी में लंबे समय तक रहे हैं। एटीएस की कार्रवाई से खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं और इन्होंने फर्जी तरीके से भारतीय नागरिकता के प्रमाणपत्र बनवा रखे हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग के सुरक्षा के दावों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। 
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मकान पर लगा ताला, मालिक का पता नहीं 
एकता विहार कॉलोनी में बांग्लादेशी पिता और पुत्र जिस मकान में रहे हैं, उस पर ताला लटका है। मकान में दूसरा किराएदार रहता है, लेकिन वह भी आजकल वहां नहीं है। पड़ोसी बताते हैं कि मकान किसका है, यह भी किसी को पता नहीं नहीं है। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक शुक्रवार को पुलिस आई, लेकिन उन्हें मकान में कोई नहीं मिला, इसके बाद पुलिस लौट गई।

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सरकारी तंत्र की मिलीभगत से बनवा लेते हैं प्रमाणपत्र
देवबंद और गंगोह में पहले भी बांग्लादेशी नागरिक पकड़े जा चुके हैं, उन्होंने सरकारी तंत्र की मिलीभगत से आधार कार्ड, पेन कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड तक बनवा रखे थे। इसका खुलासा एटीएस की कार्रवाई में हो चुका है। आरोपी तनवीर और उमर मोहम्मद उस्मान के पास से मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और बैंक से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जो यहां रहते हुए बनवाया है, जबकि आरोपियों के पास से बांग्लादेश के दस्तावेज भी मिले हैं, जो उनके बांग्लादेशी नागरिक होने का प्रमाण हैं। 

आम आदमी को काटने पड़ते हैं चक्कर 
आम आदमी को आधार कार्ड में अगर नाम भी बदलवाना हो तो उसे एक से दो माह का समय दिया जाता है। आसानी से काम नहीं हो पाता है, जबकि बांग्लादेशियों ने अवैध तरीके से यहां रहते हुए कई बार दस्तावेज बनवाएं हैं। इसका खुलासा कई बार हो चुका है। ऐसे में सरकारी तंत्र के अधिकारी और कर्मचारी भी सवालों के घेरे में हैं। 

रिमांड पर लेगी एटीएस
दोनों आरोपियों को एटीएस कोर्ट से रिमांड पर लेगी। दोनों को पकड़कर लखनऊ ले जाया गया है। एटीएस इंस्पेक्टर सुधीर उज्ज्वल ने बताया कि आरोपियों के रिमांड लेने के लिए तैयारी की जा रही है।

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