नकुड़। यूपी-हरियाणा सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो गया है। चंडीगढ़ से सर्वे ऑफ इंडिया की टीम पहुंची। टीम ने शुरुआती चरण में नकुड़ क्षेत्र के 22 गांवों का चयन किया है, जो यूपी-हरियाणा सीमा विवाद से प्रभावित हैं। करीब एक करोड़ की लागत से इन गांवों में 165 पिलर लगाए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
1984 में दीक्षित अवार्ड के तहत नकुड़ तहसील क्षेत्र से हरियाणा को 1890.27 एकड़ व हरियाणा से यूपी को 1238.20 एकड़ रकबे का आदान-प्रदान किया गया था। रिकाॅर्ड का आदान-प्रदान करते हुए तय हुए था कि बाउंड्री पर रेफरेंस और मेन पिलर लगाए जाएंगे।
उस समय पिलर लगाए भी गए थे, लेकिन यमुना नदी के कटाव या अन्य कारणों से अधिकतर पिलर या तो पानी के साथ बह गए या जमीन में दब गए।
इसकी वजह से हरियाणा और यूपी के किसानों के बीच वर्षों से सीमा विवाद चला आ रहा है। कई बार खूनी संघर्ष भी हो चुका है।
n गांव-गांव में किया जा रहा सर्वे : नकुड़ एसडीएम संगीता राघव ने बताया कि सर्वे ऑफ इंडिया की टीम के साथ तहसील अधिकारियों को लगाया गया है।
संयुक्त रूप से इसका सर्वे शुरू किया जा रहा है। उसमें देखा जा रहा है कि जमीन का कितना हिस्सा हरियाणा की सीमा में गया है और हरियाणा का कितना हमारी तरफ है। इसके बाद करीब 165 पिलर नकुड़ क्षेत्र और इसी तरह हरियाणा की तरफ भी पिलर लगेंगे।
n इतने पिलर हो चुके क्षतिग्रस्त : यूपी-हरियाणा सीमा विवाद को सुलझाने के लिए उसी दौरान दोनों तरफ 330 पिलर लगाए गए थे। इसमें 258 पिलर विलुप्त हो चुके हैं, जबकि 72 पिलर सही स्थिति में हैं। 21 पिलर पानी की धारा के बीच आ चुके हैं। अब फिर से दोनों तरफ 165-165 पिलर लगाए जाएंगे। (संवाद)